सारंगढ़ में अवैध क्रेशरों पर गंभीर सवाल: मां शारदा मिनरल्स और मंगल क्रेशर उद्योग पर नियम उल्लंघन के आरोप

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आरोप/जांच: पर्यावरण और भंडारण नियमों की खुलेआम अनदेखी का दावा

Sarangarh। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्रसिद्ध गौण खनिज क्षेत्र ग्राम गुड़ेली-टिमरलगा में अवैध खनन और क्रेशर संचालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई क्रेशर केवल कागजों पर वैध हैं, जबकि जमीनी स्तर पर पर्यावरण (environment) और खनिज (mining) नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है।

विशेष रूप से मां शारदा मिनरल्स और मंगल क्रेशर उद्योग पर आरोप है कि इनके संचालन में भंडारण और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जमीनी हकीकत बनाम कागजी कार्रवाई, लोगों के बीच उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन उसका असर जमीनी स्तर पर स्थायी रूप से दिखाई नहीं देता। सवाल उठ रहे हैं कि यदि कार्रवाई प्रभावी है, तो अवैध खनन और क्रेशर संचालन बार-बार कैसे शुरू हो जाता है।

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ क्रेशर संचालक नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से संचालन कर रहे हैं। इससे प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल

आरोपों के अनुसार संबंधित क्रेशरों में प्रदूषण रोकने के लिए पर्याप्त वृक्षारोपण, बाउंड्री वॉल और नियमित पानी छिड़काव जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं नजर नहीं आतीं।

इसके अलावा चूना पत्थर (limestone) के भंडारण स्थल पर आवश्यक सूचना बोर्ड नहीं होने की भी बात सामने आई है। आमतौर पर ऐसे बोर्ड में यह उल्लेख होना चाहिए कि सामग्री किस लीज क्षेत्र से लाई जा रही है, भंडारण क्षमता कितनी है और संचालन की स्वीकृति किन शर्तों पर मिली है।

मिलीभगत की चर्चाएं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

कुछ स्थानीय सूत्र विभागीय अधिकारियों और खनिज कारोबारियों के बीच संभावित मिलीभगत की चर्चा कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज या प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।

फिर भी लगातार उठते सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि यदि निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब सबकी नजर जिला प्रशासन पर है कि इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है। यदि व्यापक जांच होती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियमों का उल्लंघन वास्तव में किस स्तर पर हो रहा है और जिम्मेदार कौन हैं।

फिलहाल गुड़ेली-टिमरलगा क्षेत्र में अवैध खनन और क्रेशर संचालन को लेकर बहस तेज है, जबकि स्थानीय लोग पारदर्शी जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

 

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