बेटी जेश केशरवानी, नीतू सहित अन्य महिलाओं के शामिल होने का आरोप; पति राजेश केशरवानी पर फोन से धमकी देने का दावा, महिला पत्रकार का MLC कराया गया, घर में लगे CCTV फुटेज से सामने आ सकता है पूरा घटनाक्रम
एक WhatsApp मैसेज गलती से भेजे जाने के विवाद ने ऐसा गंभीर रूप ले लिया कि एक महिला पत्रकार के घर में कथित तौर पर घुसकर मारपीट की गई। महिला पत्रकार ने जिला मंत्री गायत्री केशरवानी और उनके साथ आए करीब 10 लोगों पर घर में प्रवेश कर गाली-गलौज, मारपीट और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक गायत्री केशरवानी के साथ उनकी बेटी जेश केशरवानी, , नीतू (जो उनके साथ रहती हैं) सहित कुछ अन्य महिलाएं भी मौजूद थीं। घटना में महिला पत्रकार को चोटें आई हैं। उन्हें शरीर में अंदरूनी दर्द और लगातार तकलीफ हो रही है। अस्पताल में उनका MLC भी कराया जा चुका है।
एक WhatsApp मैसेज से शुरू हुआ पूरा विवाद
महिला पत्रकार के अनुसार, पूरे विवाद की शुरुआत एक सम्मान समारोह से जुड़ी खबर से हुई थी। उन्होंने एक समाचार में गायत्री केशरवानी का नाम और फोटो देखा था, जिसके बाद वह खबर उन्हें और एक अन्य व्यक्ति को WhatsApp पर भेजी थी। उसी समय किसी अन्य व्यक्ति के साथ उनकी बहस चल रही थी और मानसिक तनाव की स्थिति में उस बातचीत का एक निजी मैसेज गलती से खबर के साथ गायत्री केशरवानी को भी चला गया।


पत्रकार का कहना है कि जैसे ही उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, उन्होंने तत्काल स्पष्ट कर दिया था कि वह मैसेज गायत्री केशरवानी के लिए नहीं था, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के साथ हुई निजी बातचीत का हिस्सा था। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी थी। उनका सवाल है कि जब मैसेज भेजने का उद्देश्य ही उन्हें अपमानित करना नहीं था और गलती स्पष्ट करने के साथ माफी भी मांग ली गई थी, तो इस बात को इतना बड़ा विवाद क्यों बनाया गया?
घर पहुंचने से पहले फोन पर धमकी देने का आरोप
महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि घटना से पहले गायत्री केशरवानी के पति राजेश केशरवानी ने फोन पर उन्हें धमकी दी थी। उनके मुताबिक फोन पर कहा गया कि वह बहुत गुस्से में हैं और बहुत कुछ कर सकते हैं। पत्रकार का यह भी आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर 5,000 रुपये में पुलिस और मीडिया को खरीदकर बदनाम करने तथा उनकी जिंदगी बर्बाद करने की धमकी दी गई।
करीब 10 लोगों के साथ घर में प्रवेश, मारपीट और जिंदगी बर्बाद करने की धमकी
महिला पत्रकार के आरोप के अनुसार, रात करीब 8 बजे गायत्री केशरवानी अपने साथ लगभग 10 लोगों को लेकर उनके घर पहुंचीं। उनके साथ उनकी बेटी जैस केशरवानी, नीतू सहित कुछ अन्य महिलाएं भी मौजूद थीं। आरोप है कि घर में प्रवेश करते ही उनके साथ गाली-गलौज, अभद्रता और मारपीट शुरू कर दी गई। उन्हें हाथों और लातों से पीटा गया, जिससे उन्हें शारीरिक चोटें आईं। घटना के बाद से उन्हें शरीर में काफी दर्द और अंदरूनी चोट की आशंका के चलते परेशानी हो रही है। अस्पताल में उनका MLC कराया जा चुका है।
महिला पत्रकार के मुताबिक इसी दौरान गायत्री केशरवानी ने कथित तौर पर धमकी देते हुए कहा कि, “मैं तुम्हारी पूरी लाइफ बर्बाद कर दूंगी। कलेक्टर, एसपी और मंत्री सब मेरे हाथ में हैं। मैं विधायक का चुनाव लड़ने वाली हूं, इतनी मेहनत कर रही हूं और तुम मेरी खबरें नहीं चलाती हो। अब तुम्हारी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दूंगी।”
बच्चे कमरे में डरकर चिल्लाते रहे, मां ने बेटी को बचाने के लिए हाथ पकड़कर रोका
घटना के समय महिला पत्रकार के बच्चे घर के एक कमरे में मौजूद थे। अचानक घर में लोगों के घुसने और हंगामा होने से बच्चे बुरी तरह घबरा गए और कमरे के अंदर से चिल्लाने लगे कि आखिर बाहर क्या हो रहा है। आरोप है कि कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश भी की गई। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए महिला पत्रकार की मां ने गायत्री केशरवानी को हाथ पकड़कर रोकने का प्रयास किया, ताकि वह अपनी बेटी को और न मारें। महिला पत्रकार के पिता और भाई भी बीच-बचाव के दौरान दूर रहकर विवाद शांत कराने की अपील कर रहे थे।
इसी दौरान हुई जोर-आजमाइश और धक्का-मुक्की में उनकी मां को भी चोटें आईं। महिला पत्रकार ने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ कोई मारपीट नहीं हुई, लेकिन वे इस घटनाक्रम से बुरी तरह भयभीत हो गए थे।
महिला पत्रकार ने बताया कि उनके घर में CCTV कैमरे लगे हैं और घटना से संबंधित फुटेज उपलब्ध है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से पूरी रिकॉर्डिंग की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है, ताकि घटना में शामिल सभी लोगों की वास्तविक भूमिका सामने आ सके।
Legal Journalist और Divorced महिला होने को कमजोरी समझने की भूल न की जाए
महिला पत्रकार ने अपनी व्यक्तिगत स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह एक Legal Journalist हैं और Divorced भी हैं। वह अपने जीवन की जिम्मेदारियां स्वयं निभाते हुए स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता कर रही हैं। उनकी वैवाहिक स्थिति या व्यक्तिगत परिस्थितियां किसी को भी उन्हें कमजोर समझने अथवा डराने-धमकाने का अधिकार नहीं देतीं।
एक महिला का अपने दम पर जीवन जीना, अपनी पहचान बनाना और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करना कोई अपराध नहीं है। उन्हें भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने तथा बिना किसी दबाव के स्वतंत्र पत्रकारिता करने का पूरा अधिकार है।
खबर प्रकाशित करना किसी की व्यक्तिगत नाराजगी का विषय नहीं, पत्रकारिता का अपना आधार होता है
पत्रकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उन पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वह गायत्री केशरवानी की खबरें प्रकाशित नहीं करतीं। इस पर उनका कहना है कि पत्रकारिता किसी व्यक्ति विशेष की हर गतिविधि का प्रचार करने का माध्यम नहीं है। समाचार का प्रकाशन उसकी News Value, जनहित और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है। हर व्यक्ति की प्रत्येक गतिविधि को समाचार बनाना किसी पत्रकार की बाध्यता नहीं है।
यदि किसी खबर को लेकर किसी व्यक्ति को आपत्ति है तो उसके लिए कानूनी और लोकतांत्रिक रास्ते उपलब्ध हैं। लेकिन किसी खबर के प्रकाशित नहीं होने की नाराजगी में किसी महिला पत्रकार के घर पहुंचकर उसके साथ मारपीट करना और उसके परिवार को भयभीत करने का आरोप बेहद गंभीर है।
महिला पत्रकार बोलीं—मेरी गलती की सजा कानून तय करेगा, कोई भीड़ नहीं
महिला पत्रकार ने कहा, “मैं भी एक इंसान हूं और मुझसे गलती हो सकती है। मैंने अपनी गलती स्वीकार की, स्पष्ट किया कि मैसेज किसी अन्य व्यक्ति के लिए था और माफी भी मांगी। लेकिन क्या एक मैसेज की गलती इतनी बड़ी हो सकती है कि किसी महिला के घर में लोगों के साथ घुसकर मारपीट की जाए? मेरे बच्चे घर के अंदर डरकर चिल्लाते रहे। मेरी मां ने मुझे बचाने के लिए हाथ पकड़कर रोकने की कोशिश की। आखिर मेरे परिवार का क्या कसूर था?”
उन्होंने आगे कहा कि वह किसी से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ना चाहतीं। उनका उद्देश्य केवल अपने और अपने परिवार के लिए न्याय प्राप्त करना है। एक महिला पत्रकार के रूप में उन्हें भी सम्मानपूर्वक अपनी बात रखने, स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता करने और अपने घर में सुरक्षित रहने का अधिकार है।
पुलिस से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
महिला पत्रकार ने बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस को शिकायत दी है और FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं। अस्पताल में उनका MLC भी कराया जा चुका है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि शिकायत में नामजद सभी व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। घर में लगे CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, फोन पर दी गई कथित धमकियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाए। घटना में शामिल पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध उचित कानूनी धाराओं में FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
महिला पत्रकार ने अंत में कहा कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है। उनकी किसी गलती का निर्धारण और उसकी सजा तय करने का अधिकार कानून को है, किसी व्यक्ति या भीड़ को नहीं। एक महिला की गरिमा, परिवार का सम्मान और बच्चों की सुरक्षा कोई मामूली बात नहीं है। वह सिर्फ इतना चाहती हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें न्याय मिले।


