बिलासपुर। सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत जानकारी देने में लापरवाही और आवेदक को गुमराह करने के मामले में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन ने कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी एवं वर्तमान सहायक संचालक पी दासरथी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह राशि सीधे उनके वेतन से काटकर शासकीय कोष में जमा की जाएगी।
RTI आवेदन में मांगी गई थी स्कूलों और अनुदान की जानकारी
यह पूरा मामला 5 अप्रैल 2022 को दायर एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। आवेदक आनंद कुमार जायसवाल ने बापा वनवासी सेवा मंडल द्वारा संचालित स्कूलों, उन्हें मिलने वाले सरकारी अनुदान और वर्ष 2008 से 2021 के बीच नियुक्त शिक्षकों-कर्मचारियों की जानकारी मांगी थी।
आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने नियमों की गलत व्याख्या कर आवेदन को निरस्त कर दिया और बाद में भी अधूरी व भ्रामक जानकारी दी।
आयोग के आदेश की अवहेलना, सुनवाई में भी रहे अनुपस्थित
मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचने के बाद 19 फरवरी 2025 को स्पष्ट आदेश जारी हुआ कि आवेदक को मांगी गई जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए। इसके बावजूद जानकारी देने में टालमटोल जारी रही।
आयोग ने कई बार सुनवाई तय की, लेकिन अधिकारी अनुपस्थित रहे। इसे आयोग ने आदेशों की सीधी अवहेलना और गंभीर लापरवाही माना।
दस्तावेज मंडला में मिले, 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
जांच में सामने आया कि संबंधित दस्तावेज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं थे, बल्कि मध्यप्रदेश के मंडला स्थित कार्यालय में रखे गए हैं। आयोग ने वर्तमान जन सूचना अधिकारी को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर प्रमाणित दस्तावेज मंगाकर आवेदक को उपलब्ध कराएं और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
सख्त संदेश: RTI में लापरवाही अब नहीं चलेगी
इस कार्रवाई को RTI कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि सूचना देने में लापरवाही, देरी या गलत जानकारी देने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


