2011 से खेल रहा शहर, डेढ़ लाख किराए के बाद अब अपने मैदान की आस
रायगढ़ । स्केटिंग की रफ्तार और गेंद के खेल का रोमांच एक साथ देखने को मिले तो मुकाबला अपने आप खास हो जाता है। रायगढ़ में 3 अक्टूबर से शुरू हो रही 6वीं सब-जूनियर (अंडर-14) ईस्ट जोन रोल बॉल चैंपियनशिप – 2026 कुछ ऐसा ही रोमांच लेकर आ रही है। दो दिवसीय यह स्पर्धा रायगढ़ एक एमएमहैस्टेडियम में आयोजित होगी, जिसमें छत्तीसगढ़, असम, झारखंड, बंगाल सहित ईस्ट जोन के राज्यों और सेवन सिस्टर्स क्षेत्र से करीब 300 खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं।
छत्तीसगढ़ रोल बॉल एसोसिएशन एवं रायगढ़ रोल बॉल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता को लेकर शुक्रवार को श्याम मंदिर के प्रथम तल पर प्रेस वार्ता हुई। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने बताया कि खिलाड़ियों के रायगढ़ पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। मेहमान खिलाड़ियों के लिए पिक एंड ड्रॉप, आवास, भोजन और सुरक्षा किट की व्यवस्था की गई है। खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था भगवानपुर स्थित अग्रोहाधाम में की गई है।
मैदान पर रफ्तार, बाहर व्यवस्थाओं की पूरी तैयारी
समाजसेवी एवं रायगढ़ रोल बॉल एसोसिएशन के पदाधिकारी मुकेश मित्तल ने प्रतियोगिता की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि खिलाड़ियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। दर्शकों के लिए बैठक व्यवस्था के साथ आपातकालीन मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। प्रतियोगिता के लिए करीब 6 लाख रुपये का बजट रखा गया है और आयोजन में सरकार से आर्थिक सहायता नहीं मिलने की जानकारी एसोसिएशन ने दी।
रायगढ़ बना रोल बॉल का मजबूत केंद्र
एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं कोच आबिद साबरी ने बताया कि भारत में रोल बॉल खेल की शुरुआत हुई और पुणे से इसे पहचान मिली। देश के विभिन्न राज्यों में यह खेल खेला जा रहा है। रायगढ़ में वर्ष 2011 से रोल बॉल का प्रशिक्षण चल रहा है। उनके अनुसार अब तक रायगढ़ के खिलाड़ी करीब 350 राष्ट्रीय और 750 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं,जबकि तीन खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल चुके हैं। रायगढ़ का प्रभाव इस बात से भी समझा जा सकता है कि राज्य स्तरीय टीम में 12 खिलाड़ियों में से 8 खिलाड़ी रायगढ़ के रहे हैं। पिछले वर्ष असम में हुई प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ ने दूसरा स्थान हासिल किया था और टीम के सभी खिलाड़ी रायगढ़ से थे।
15 साल से खेल रहे खिलाड़ी, अपना मैदान अब भी सपना!
रोल बॉल की कहानी का सबसे बड़ा सवाल यहीं खड़ा होता है। 2011 से रायगढ़ में खेल चल रहा है, लेकिन खिलाड़ियों के पास लंबे समय तक अपना मैदान नहीं था। एसोसिएशन के अनुसार प्रशिक्षण के लिए स्कूल मैदान का उपयोग करते हुए अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये किराए में खर्च हो चुके हैं।यानी खिलाड़ी 15 साल से मैदान खोज रहे हैं और शहर खेल सुविधाओं का इंतजार कर रहा है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जिस शहर के बच्चे राज्य की टीम में बड़ी संख्या में जगह बना रहे हैं, उन्हें अभ्यास के लिए मैदान के लिए किराया देना पड़ा। दुर्भाग्यजनक है कि रायगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं, कमी रही तो बस उस जमीन की जिस पर ये प्रतिभाएं अपना खेल दिखा सकें। बच्चे रोलर पहनकर दौड़ते रहे और मैदान की तलाश चलती रही!
अब बन रहा रोल बॉल एरेना, उम्मीदों को मिली रफ्तार
एसोसिएशन पदाधिकारियों मनोज अग्रवाल और विक्रम ने बताया कि विधायक बनने के बाद ओपी चौधरी से जुड़े प्रयासों के बीच मिनी स्टेडियम में रोल बॉल एरेना और अन्य खेल अधोसंरचना का निर्माण आगे बढ़ा है। उपलब्ध सरकारी/स्थानीय निकाय दस्तावेजों में रायगढ़ स्टेडियम में रोल बॉल, कबड्डी एवं ट्रेनिंग ग्राउंड के लिए निविदा का उल्लेख है।
जून 2026 में ओपी चौधरी ने मिनी स्टेडियम के निरीक्षण के दौरान निर्माणाधीन स्केटिंग रिंक एवं रोल बॉल एरेना की प्रगति की समीक्षा भी की थी। प्रेसवार्ता मे समाज सेवी व श्याममंडल के अध्यक्ष बजरंग लेंन्ध्रा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
खिलाड़ियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है—अब उम्मीद है कि जिस खेल ने रायगढ़ को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, उसे भी शहर में स्थायी और बेहतर प्रशिक्षण सुविधा मिलेगी।
ईस्ट जोन में छह टीमें मैदान में
एसोसिएशन के अनुसार ईस्ट जोन की करीब 14 टीमों में से फिलहाल छह टीमों के पहुंचने की पुष्टि है। प्रतियोगिता के लिए झारखंड से नेशनल कोऑर्डिनेटर भी रायगढ़ पहुंच चुके हैं। आयु सीमा की जांच भी अधिकृत कोऑर्डिनेटर द्वारा की जाएगी। रोल बॉल में 40×20 मीटर का मैदान उपयोग होता है, जबकि सब-जूनियर खिलाड़ियों के लिए छोटे आकार का मैदान निर्धारित किया जाता है। आयोजन के दौरान खिलाड़ी पूरी सुरक्षा किट के साथ मैदान पर उतरेंगे।
रायगढ़ के लिए सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, खेल संस्कृति का इम्तिहान
यह चैंपियनशिप महज दो दिन का खेल आयोजन नहीं है। यह रायगढ़ की उस खेल प्रतिभा का प्रदर्शन भी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची है। अब जरूरत इस बात की है कि प्रतियोगिता खत्म होने के बाद भी खिलाड़ियों के लिए मैदान, प्रशिक्षण और नियमित प्रतियोगिताओं की सुविधाएं बनी रहें।


