नई दिल्ली। भारतीय सुरक्षा बलों—सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) और पुलिस—में बढ़ती आपसी गोलीबारी (फ्रैट्रिसाइड) की घटनाओं ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक तनाव, लंबे समय तक कठिन और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती, छुट्टियों की कमी, कार्यभार और पारिवारिक समस्याएं इन घटनाओं के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इस विषय पर गंभीर चिंतन और प्रभावी रोकथाम की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
मानसिक तनाव और कार्यभार को माना जा रहा प्रमुख कारण
जानकारों के अनुसार, लगातार तनावपूर्ण माहौल, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, पर्याप्त आराम और नींद की कमी, समय पर अवकाश न मिलना तथा लंबे समय तक परिवार से दूर रहने के कारण जवान मानसिक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे हालात में छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़कर गंभीर घटनाओं का रूप ले सकते हैं।
हालिया घटना ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में मध्य प्रदेश के नौगांव स्थित सीआरपीएफ की 34वीं बटालियन में एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा अपने दो साथियों की गोली मारकर हत्या करने और बाद में आत्महत्या करने की घटना ने सुरक्षा बलों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियों को लेकर बहस तेज कर दी है।
पूर्व अधिकारियों और संगठन ने उठाए मुद्दे
अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने लंबे समय तक प्रमोशन का इंतजार, जवानों की कमी, बढ़ते कार्यभार, चुनावी ड्यूटी, धार्मिक यात्राओं की सुरक्षा, पारिवारिक तनाव और छुट्टियों में बाधा को प्रमुख कारण बताया।
वहीं, सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एच.आर. सिंह ने भी पदोन्नति में देरी, खाली पदों और बढ़ते मानसिक दबाव को गंभीर समस्या बताते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सुधारात्मक उपायों की मांग
विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि सुरक्षा बलों में खाली पदों को शीघ्र भरा जाए, अतिरिक्त बटालियन गठित की जाएं, समय पर छुट्टियां सुनिश्चित हों, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाए तथा तनाव कम करने के लिए प्रभावी काउंसलिंग और सहायता तंत्र विकसित किया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार आत्महत्या, आपसी गोलीबारी और बड़ी संख्या में नौकरी छोड़ने जैसी घटनाओं पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी कर स्थिति का समग्र मूल्यांकन करे।


