रायपुर। छत्तीसगढ़ में न्यायिक सेवा से जुड़ी एक अहम प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने हाईकोर्ट की अनुशंसा पर प्रदेश के पांच सिविल जज जूनियर डिवीजन के त्यागपत्र स्वीकार करते हुए उन्हें अप्रैल माह में कार्यमुक्त करने का आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद न्यायिक और अधिवक्ता जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हाईकोर्ट की अनुशंसा के बाद जारी हुआ आदेश
जानकारी के अनुसार, पांचों न्यायिक अधिकारियों ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा सौंपा था। मामले की जांच और प्रक्रिया पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने त्यागपत्र स्वीकार करने की अनुशंसा राज्य शासन को भेजी थी, जिसके आधार पर विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने आदेश जारी किया।
जिन जजों के इस्तीफे स्वीकार हुए
त्यागपत्र स्वीकार किए गए अधिकारियों में शामिल हैं—
- द्विव सिंह सेंगर – सिविल जज जूनियर डिवीजन, दुर्ग
- प्रिय दर्शन गोस्वामी – चतुर्थ सिविल जज जूनियर डिवीजन, महासमुंद
- नंदनी पटेल – सिविल जज जूनियर डिवीजन, रायपुर
- भामिनी राठी – अष्टम सिविल जज जूनियर डिवीजन, रायपुर
- अर्पित गुप्ता – प्रथम सिविल जज जूनियर डिवीजन, रायपुर
सामूहिक इस्तीफों से उठे सवाल
एक साथ पांच न्यायिक अधिकारियों के इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यायिक सेवा जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा पास कर चयनित अधिकारियों का सेवा छोड़ना सामान्य घटना नहीं माना जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच भी इस निर्णय को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हो रही हैं।
कारणों पर अटकलें जारी
हालांकि आधिकारिक तौर पर सभी ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है, लेकिन न्यायिक हलकों में इसके पीछे कार्य परिस्थितियों, दबाव या अन्य कारणों को लेकर भी चर्चा चल रही है। फिलहाल विभाग की ओर से इस संबंध में कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की गई है।
न्याय व्यवस्था पर असर संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि निचली अदालतों में पहले से लंबित मामलों के बीच न्यायिक अधिकारियों की कमी से कार्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे में रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति महत्वपूर्ण होगी।
