रायगढ़। अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से रायगढ़ (Raigarh) पुलिस कंट्रोल रूम में प्रशिक्षु उप निरीक्षकों और जिले के विभिन्न थानों से चयनित आरक्षकों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर के दिशा-निर्देश और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
वैज्ञानिक अनुसंधान तकनीकों की दी गई विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अपराध अनुसंधान से जुड़ी आधुनिक तकनीकों तथा वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की विधियों में दक्ष बनाना था। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को घटनास्थल निरीक्षण, फिंगरप्रिंट संग्रहण, साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण तथा मिनी फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट के प्रभावी उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।
NAFIS और MCU संचालन का व्यवहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) (National Automated Fingerprint Identification System) में आरोपियों की जानकारी दर्ज करने की सही प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही MCU के माध्यम से आरोपियों के आईरिस स्कैन और फोटोग्राफ संग्रहण की तकनीक पर भी व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
डीएसपी विद्या जौहर और टीम ने किया डेमो
बिलासपुर रेंज की संभागीय अंगुल चिन्ह विशेषज्ञ एवं उप पुलिस अधीक्षक विद्या जौहर ने अपनी टीम के साथ प्रशिक्षण सत्र का संचालन किया। उन्होंने मिनी फिंगरप्रिंट डेवलपिंग किट का लाइव डेमो देकर प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को व्यावहारिक अभ्यास कराया। इस दौरान प्रतिभागियों के सवालों का समाधान करते हुए वैज्ञानिक जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की गई।
DCRB और विशेषज्ञ टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका
प्रशिक्षण शिविर में जिला अपराध अभिलेख शाखा (DCRB) प्रभारी सहायक उप निरीक्षक संदीप गायकवाड़, NAFIS यूजर प्रभात प्रधान तथा फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट सुबोध सागर और दिलीप लकड़ा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एसएसपी का संदेश
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि, “अपराधों के वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी दक्षता से ही गुणवत्तापूर्ण विवेचना संभव है। प्रत्येक पुलिसकर्मी को आधुनिक जांच तकनीकों में दक्ष बनाना हमारी प्राथमिकता है।”


