नृत्य गुरु प्रियांशी बिजलवाण के निर्देशन में हुआ गरबा उत्सव, छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने बांधा समां; नृत्य, संगीत और परंपरा का दिखा खूबसूरत संगम
रायगढ़। चूड़ियों की खनक, गरबा की पारंपरिक थाप और रंग-बिरंगे परिधानों की मनमोहक छटा के बीच चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय का परिसर नवरात्रि के उल्लास में सराबोर नजर आया। बुधवार, 14 अक्टूबर को बोईरदादर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित महाविद्यालय में आयोजित गरबा नृत्य कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। पारंपरिक नृत्य की लय और सामूहिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
नृत्य गुरु प्रियांशी बिजलवाण के निर्देशन में सजा आयोजन
नृत्य गुरु प्रियांशी बिजलवाण के कला निर्देशन में शाम 5 बजे से 7 बजे तक गरबा उत्सव आयोजित किया गया। इस दौरान नृत्य कला से जुड़े छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक गरबा शैली और आकर्षक नृत्य मुद्राओं के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
रंगीन पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों के कदम जैसे ही गरबा की लय पर थिरके, परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल बन गया। सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को खास बना दिया और दर्शकों के सामने भारतीय लोकसंस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
नृत्य और संगीत के साथ संस्कृति व परंपरा का संदेश
गरबा भारतीय लोकसंस्कृति की ऐसी पारंपरिक नृत्य विधा है, जिसमें संगीत, आस्था और सामूहिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। नवरात्रि के दौरान इसका विशेष महत्व है। चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अपनी नृत्य प्रतिभा दिखाने के साथ ही पारंपरिक कलाओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
आयोजन के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी को लोकपरंपराओं के महत्व से परिचित कराने का संदेश भी दिया गया।
कला-संस्कृति के आयोजनों में भागीदारी की अपील
चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय की ओर से कला और संगीत के प्रति रुचि रखने वाले लोगों से सांस्कृतिक आयोजनों में अधिकाधिक भागीदारी करने की अपील की गई। आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक नृत्य शैलियों को प्रोत्साहित करना, कला के प्रति रुचि बढ़ाना और युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ना रहा।
गरबा की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और प्रतिभागियों के उत्साह के बीच संपन्न यह आयोजन नवरात्रि के उल्लास में सांस्कृतिक रंग भर गया।


