रायगढ़: नियमों की अनदेखी पर शिक्षा विभाग का कड़ा प्रहार, लैलूंगा के कन्या संस्कृत विद्यालय की मान्यता पर मंडराया संकट

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DEO का अल्टीमेटम: न शिक्षक योग्य हैं, न स्कूल के पास पर्याप्त जमीन; 7 दिनों में जवाब न मिलने पर रद्द होगी मान्यता

रायगढ़@दैनिक खबर सार :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में शिक्षा के गिरते स्तर और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले निजी शिक्षण संस्थानों के खिलाफ जिला प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। ताजा मामला लैलूंगा विकासखण्ड के तुलाराम आर्य कन्या संस्कृत विद्यालय (गोहडीडीपा, राजपुर) का है, जहाँ भारी अनियमितताओं और शासन के मापदण्डों का उल्लंघन पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने सख्त रुख अपनाते हुए संस्था की मान्यता समाप्त करने की चेतावनी जारी की है।

जांच दल की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा..

इस संपूर्ण कार्यवाही की जड़ में स्थानीय नागरिक पंकज भोय द्वारा दिसंबर 2025 में दर्ज कराई गई एक लिखित शिकायत है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी लैलूंगा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया था। जांच दल ने 3 फरवरी 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें स्कूल के संचालन को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार, स्कूल प्रबंधन हायर सेकेण्डरी स्तर की कक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी अहर्ताओं को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है। विभाग ने इसे शासन के साथ-साथ छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ माना है।

इन तीन बिंदुओं पर फंसा पेंच..

DEO कार्यालय द्वारा जारी नोटिस (क्रमांक 2096) में विद्यालय की तीन प्रमुख खामियों को रेखांकित किया गया है:

  1. अयोग्य शिक्षक: जांच में पाया गया कि विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के पास शासन द्वारा निर्धारित अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता नहीं है। बिना पात्र शिक्षकों के स्कूल का संचालन अवैध माना गया है।
  2. संसाधनों का अभाव: हायर सेकेण्डरी स्कूल के सफल संचालन के लिए आवश्यक प्रयोगशाला, पुस्तकालय और पर्याप्त कक्षाओं जैसे संसाधनों की भारी कमी पाई गई है।
  3. भूमि स्वामित्व विवाद: विद्यालय जिस भूमि पर संचालित हो रहा है, उसके मालिकाना हक और राजस्व संबंधी दस्तावेजों में भारी विसंगतियां हैं। शासन के मापदंडों के अनुसार स्कूल के पास अपनी स्पष्ट भूमि का अधिकार होना अनिवार्य है।

7 दिनों का समय: आर-पार की लड़ाई..

जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय के संचालक और प्राचार्य को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे पत्र प्राप्ति के 7 दिनों के भीतर स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें। विभाग ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो विद्यालय की मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी। मान्यता रद्द होने की स्थिति में वहां पढ़ रही छात्राओं के भविष्य की जिम्मेदारी पूरी तरह स्कूल प्रबंधन की होगी।

शिक्षा जगत में मची खलबली..

रायगढ़ जिले में इस कार्यवाही के बाद उन निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है, जो केवल कागजों पर मापदंड पूरे कर संस्थान चला रहे हैं। जिला प्रशासन की इस सक्रियता ने यह संदेश दे दिया है कि शिक्षा के नाम पर व्यापार और नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर रायगढ़ को भी इस मामले की प्रतिलिपि भेजी गई है, जिससे स्पष्ट है कि जिला प्रशासन इस मामले की निरंतर निगरानी कर रहा है। अब सबकी नजरें विद्यालय प्रबंधन के जवाब पर टिकी हैं—क्या वे अपनी कमियां सुधार पाएंगे या लैलूंगा का यह विद्यालय इतिहास बनकर रह जाएगा?

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