तबादले के बाद भी नहीं थमा विवाद, फर्जी बिल्टी, संदिग्ध वाहन नंबर, GPS डेटा और भुगतान में गड़बड़ी के आरोप
बिलासपुर। NTPC सीपत में राखड़ परिवहन और सेनोस्फीयर के संग्रहण एवं बिक्री को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला लगातार चर्चा में है। फर्जी बिल्टी, वाहन नंबरों में कथित हेरफेर, GPS ट्रैकिंग और भुगतान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम सुखरीपाली के ठाकुरदेवा के पास करीब पांच माह से आंदोलन जारी है। उनका कहना है कि AGM अनंत वासने के बिहार स्थानांतरण के बाद भी मामले से जुड़े सवालों का जवाब मिलना बाकी है।
शिकायतकर्ताओं ने NTPC प्रबंधन, सतर्कता विभाग और संबंधित जांच एजेंसियों से परिवहन दस्तावेजों, कार्यादेशों तथा भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से भी मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों तथा जांच के निष्कर्षों का सामने आना जरूरी है।
सेनोस्फीयर का टेंडर बंद होने पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, NTPC सीपत के राखड़ डैम से सेनोस्फीयर का संग्रहण कर उसे बोरियों में भरने और अधिकृत ठेकेदारों के माध्यम से विशाखापत्तनम सहित विभिन्न औद्योगिक केंद्रों तक भेजने की व्यवस्था थी। आरोप है कि अनंत वासने के कार्यकाल में इसकी टेंडर प्रक्रिया बंद हो गई।
सेनोस्फीयर की व्यावसायिक उपयोगिता को देखते हुए ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि टेंडर किस आदेश के तहत बंद किया गया और इसका NTPC के राजस्व पर क्या प्रभाव पड़ा। उन्होंने संबंधित टेंडर दस्तावेजों, बिक्री रिकॉर्ड, अनुबंधों और वित्तीय ऑडिट की जांच कराने की मांग की है, ताकि संभावित राजस्व नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
बिल्टी और परिवहन रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि कुछ मामलों में कम दूरी पर राखड़ की आपूर्ति के बावजूद रिकॉर्ड में 500 से 1,000 किलोमीटर तक परिवहन दर्शाए जाने की आशंका है। उन्होंने एक ही वाहन के नाम पर 15 से 25 अलग-अलग नंबरों से ट्रिप दर्ज होने की संभावना भी जताई है।
इसके अलावा GPS लोकेशन में कथित हेरफेर, 60 से 80 टन राखड़ के हिसाब और भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित रिकॉर्ड का आपस में मिलान कराया जाए। इसमें वाहन पंजीयन प्रमाणपत्र, चेसिस नंबर, बिल्टी, वे-ब्रिज पर्ची, गेट पास, टोल रसीद, FASTag विवरण और वास्तविक डिलीवरी रिकॉर्ड शामिल हैं।
उनका कहना है कि दस्तावेजों की तकनीकी जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिवहन वास्तव में निर्धारित मार्ग और दूरी के अनुसार हुआ था या रिकॉर्ड में कोई विसंगति थी।
भुगतान और कथित हिस्सेदारी की भी जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने कुछ परिवहनकर्ताओं से कथित 50 प्रतिशत हिस्सेदारी और भुगतान में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उन्होंने संबंधित अनुबंधों, बैंक लेन-देन और भुगतान रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
आंदोलनकारियों ने अनंत वासने और संबंधित परिवहनकर्ताओं के बीच कथित मिलीभगत की जांच की भी मांग की है। हालांकि, किसी अधिकारी या परिवहनकर्ता की संलिप्तता को फिलहाल प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इसके लिए वित्तीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि परिवहन दस्तावेजों में गड़बड़ी की आशंका थी, तो NTPC की आंतरिक निगरानी व्यवस्था और सतर्कता विभाग ने इस संबंध में क्या कार्रवाई की। उन्होंने CISF तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
आंदोलनकारियों का दावा है कि अधिकारियों और सतर्कता विभाग तक शिकायतें पहुंचाने के बावजूद उन्हें अब तक ठोस कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने NTPC प्रबंधन के साथ-साथ NHAI और बिलासपुर RTO की भूमिका की भी पड़ताल करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी अधिकारी का स्थानांतरण अपने आप में जांच का विकल्प नहीं हो सकता। उनके अनुसार, संबंधित कार्यकाल में लिए गए फैसलों, टेंडर प्रक्रिया और परिवहन व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
CBI से व्यापक जांच कराने की मांग
ग्रामीणों ने लारा NTPC के संदर्भ का उल्लेख करते हुए सीपत में भी व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने सेनोस्फीयर का टेंडर बंद किए जाने के कारणों, राखड़ परिवहन के कार्यादेशों, बिल्टी, GPS डेटा, टोल रिकॉर्ड और भुगतान का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग रखी है।
उन्होंने यह भी कहा कि पर्याप्त कानूनी आधार मिलने पर संबंधित बैंक खातों और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच नियमानुसार की जानी चाहिए, ताकि कथित आर्थिक लेन-देन और संभावित मिलीभगत की वास्तविकता सामने आ सके।
अब मामले में मुख्य सवाल यह है कि सेनोस्फीयर टेंडर से लेकर राखड़ परिवहन तक के रिकॉर्ड में कोई अनियमितता हुई या नहीं और क्या इससे NTPC को राजस्व नुकसान पहुंचा। इन सवालों का जवाब दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक निष्कर्षों से ही मिल सकता है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।


