प्रस्तावित रेल परियोजना से 24 गांवों के किसानों की बढ़ी परेशानी, चार महीने से जमीन संबंधी काम प्रभावित

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खरीदी-बिक्री, बंटवारा और डायवर्शन पर रोक से ग्रामीण परेशान, प्रशासन से प्रभावित खसरों की स्पष्ट जानकारी जारी करने की मांग

रायगढ़। जिले में प्रस्तावित रेल परियोजना को लेकर आसपास के करीब 24 गांवों के किसानों और जमीन मालिकों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के कारण इन गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री, बंटवारा, डायवर्शन और अन्य राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हैं। करीब चार महीने से स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण जमीन मालिकों को लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

पूरी ग्राम सीमा पर रोक से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों के मुताबिक, परियोजना के लिए प्रभावित होने वाली जमीन और खसरों की अंतिम स्थिति स्पष्ट किए बिना संबंधित गांवों में राजस्व कार्यों पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय स्तर पर जमीन मालिकों को बताया जा रहा है कि प्रशासनिक आदेश के कारण फिलहाल जमीन से जुड़े कई कार्य नहीं किए जा सकते।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि प्रस्तावित रेल लाइन केवल कुछ विशेष खसरों से होकर गुजरनी है, तो पूरे गांव की जमीन को प्रतिबंधित रखने के बजाय प्रभावित भूमि की पहचान कर उसी पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही।

इन गांवों की जमीनों पर राजस्व कार्य प्रभावित

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रायगढ़ तहसील के कुशवाबहरी, उर्दना, आमापाल, लामीदरहा, गढ़कुरी, गोवर्धनपुर, कोतरलिया, पतरापाली और कोटमार तथा खरसिया तहसील के तिऊर, तुरेकेला, परसकोल, औरदा, ठूसेकेला, मदनपुर, भेलवांडीह, बानीपाथर, रजघटा, छोटे डूमरपाली, बड़े डूमरपाली, गिनडोला, नहरपाली, सिंघनपुर, बिलासपुर और भूपदेवपुर गांवों की जमीनों से संबंधित राजस्व कार्यों पर प्रतिबंध की बात सामने आई है।

निर्देशों के तहत प्रस्तावित अधिग्रहण वाली भूमि के क्रय-विक्रय, रहन, अंतरण, बटांकन, अपवर्तन और बंटवारे पर रोक का उल्लेख किया गया है।

कॉलोनियों और जमीन कारोबार पर भी असर

रायगढ़ शहर के आसपास के कुछ प्रभावित गांवों में पहले से छोटी-बड़ी कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। ग्रामीणों और जमीन कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, राजस्व प्रक्रिया प्रभावित होने से इन क्षेत्रों में प्लॉट की खरीद-बिक्री और डायवर्शन की प्रक्रिया भी अटक गई है।

वहीं, कई परिवारों की पैतृक जमीन के बंटवारे की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की बात सामने आई है। कुछ जमीन मालिकों का कहना है कि आवास निर्माण या अन्य जरूरतों के लिए बैंक ऋण लेने में भी परेशानी आ रही है।

चार महीने बाद भी रूट को लेकर सवाल

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल प्रस्तावित रेल लाइन के वास्तविक रूट को लेकर है। उनका कहना है कि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रेल लाइन किन गांवों से होकर गुजरेगी और किन-किन खसरों की जमीन वास्तव में परियोजना से प्रभावित होगी।

ग्रामीणों की मांग है कि रेलवे से रूट और प्रभावित खसरों की स्पष्ट जानकारी लेकर प्रशासन जल्द से जल्द वास्तविक प्रभावित भूमि चिह्नित करे और शेष जमीन पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया जाए।

ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी

गांवों के प्रभावित जमीन मालिकों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो वे अपनी मांगों को लेकर उच्च न्यायालय का रुख करने के साथ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने पर भी विचार कर रहे हैं।

गोवर्धनपुर निवासी अजय उरांव का कहना है कि ग्रामीणों की जमीन से जुड़े काम लंबे समय से प्रभावित हैं। उनका कहना है कि परिवार की पैतृक भूमि के बंटवारे की प्रक्रिया पहले से चल रही थी, लेकिन रेल परियोजना के कारण वह भी रुक गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रेलवे के लिए प्रभावित जमीन की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं है, तो सामान्य ग्रामीणों को परेशानी क्यों उठानी पड़ रही है।

प्रशासन ने रेलवे से मांगी रूट की स्पष्ट जानकारी

मामले में रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के अनुसार, जमीन संबंधी प्रतिबंध को लेकर रेलवे से मार्ग की सटीक जानकारी मांगी गई है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जा रही है, ताकि आगे चलकर केवल वास्तविक रूप से प्रभावित खसरों पर ही आवश्यक प्रतिबंध लागू रहे।

प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रियाओं में प्रभावित जमीन की पहचान और आवश्यक राजस्व कार्रवाई की जाती है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि रेलवे की ओर से प्रस्तावित मार्ग और प्रभावित खसरों की जानकारी कब तक स्पष्ट होती है।

ग्रामीणों का सीधा सवाल—रेल लाइन आखिर जाएगी कहां से?

प्रस्तावित रेल परियोजना को लेकर अब प्रभावित गांवों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रेल लाइन का वास्तविक रूट क्या है और इसमें कितनी जमीन आएगी? ग्रामीणों का कहना है कि जब तक यह जानकारी स्पष्ट नहीं होती, तब तक पूरे गांव की जमीन पर प्रतिबंध लगाए रखना उनके लिए आर्थिक और पारिवारिक स्तर पर बड़ी परेशानी पैदा कर रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित भूमि का सीमांकन और खसरा स्तर पर स्थिति जल्द स्पष्ट की जाए, ताकि परियोजना की प्रक्रिया भी आगे बढ़े और गैर-प्रभावित जमीन मालिकों के राजस्व संबंधी काम भी बाधित न हों।

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