रायपुर। कथा और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर जन संस्कृति मंच (जसम) रायपुर द्वारा ग्रीन पैराडाइज सोसायटी में ‘प्रेमचंद और युवा : स्वप्न, संघर्ष और सामाजिक जिम्मेदारी’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता तथा युवाओं की सामाजिक भूमिका पर अपने विचार रखे।
प्रेमचंद के साहित्य में सच और न्याय की प्रेरणा
जसम के राष्ट्रीय सचिव एवं संस्कृतिकर्मी राजकुमार सोनी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य हर दौर में सच और न्याय के पक्ष में खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘पंच परमेश्वर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ईमान और न्याय की राह पर चलना ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने युवाओं की सामाजिक भागीदारी और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर हुई चर्चा
गोष्ठी में किसान प्रतिनिधि नरोत्तम शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में किसानों और मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने वर्तमान समय में भी इन वर्गों के हितों की रक्षा के लिए जागरूक रहने की आवश्यकता बताई।
युवा पीढ़ी और सामाजिक चेतना पर जोर
संस्कृतिकर्मी समीक्षा नायर ने संगठन में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने के सुझाव दिए। वहीं जसम की प्रदेश अध्यक्ष रुपेंद्र तिवारी के आलेख का वाचन करते हुए कहा गया कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी, अन्याय के खिलाफ खड़े होने और मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
साहित्य और संगीत से सजी गोष्ठी
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायिका वर्षा बोपचे ने जनगीतों की प्रस्तुति दी। मजदूर साथी एवं कवि भागीरथी वर्मा ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। डॉ. पूनम संजू, सीमा कुजूर और लेखिका सनियारा खान ने भी प्रेमचंद के साहित्य, उनके जीवन और आज के समाज में उनकी प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए।
प्रेमचंद आज भी प्रासंगिक
वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल साहित्यिक धरोहर नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का महत्वपूर्ण माध्यम है। उनके पात्र और रचनाएं आज भी समाज को समानता, न्याय और मानवीय मूल्यों की सीख देती हैं।




