धरमजयगढ़ में पटवारी राकेश साय निलंबित, तहसीलदार कापू की रिपोर्ट में खुला अवैध जमीन बिक्री घोटाला

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प्रतीक मल्लिक ✍️

Highlights

  • सरकारी जंगल भूमि को फर्जी तरीके से बेचने का आरोप
  • पूर्व बीडीसी रोशन खेस की शिकायत पर शुरू हुई जांच
  • तहसीलदार कापू की रिपोर्ट दिनांक 21.07.2025 में आरोप सही पाए गए
  • नियम 1965 और 1966 के तहत तत्काल निलंबन आदेश
  • एफआईआर दर्ज होगी या नहीं, बना बड़ा सवाल

धरमजयगढ़ में राजस्व विभाग के पटवारी राकेश साय को अवैध रूप से सरकारी जमीन बेचने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई तहसीलदार कापू के प्रतिवेदन दिनांक 21.07.2025 के आधार पर की गई है। इस प्रकरण ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और अब यह बहस छिड़ी है कि क्या निलंबन के बाद एफआईआर भी दर्ज होगी।

आरोप और शिकायत

गांव रायमेर के पूर्व बीडीसी रोशन खेस ने इस मामले की शिकायत सबसे पहले एसडीएम, फिर कलेक्टर और उसके बाद मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रायमेर गांव की बड़े झाड़ जंगल मद की भूमि (खसरा नं. 467, रकबा 1.243 हे.) को निजी बताकर फर्जी रजिस्ट्री के जरिए बेचा गया।

रिपोर्ट और निलंबन आदेश

शिकायत पर हुई जांच में तहसीलदार कापू की रिपोर्ट (21.07.2025) में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसमें यह भी दर्ज हुआ कि कई खसरा नंबर (479/2 – 2.023 हे., 467/36 – 0.874 हे., 467/25 – 0.695 हे., 467/23 – 0.548 हे., 310/10/ख/1 – 0.974 हे., 310/10/ख/2 – 2.011 हे., 310/10/2 – 2.758 हे.) मूल अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं। इसे फर्जी बटांकन मानते हुए राकेश साय को छ.ग. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 और सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय धरमजयगढ़ नियत किया गया है और जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

प्रभाव और उठते सवाल

ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपी पटवारी पर एफआईआर भी दर्ज होनी चाहिए। सवाल यह भी है कि क्या इसी तरह के अन्य घोटालों की जांच होगी या नहीं। खासतौर पर धरमजयगढ़ कॉलोनी प्रकरण लंबे समय से चर्चाओं में है, जिसमें पटवारी का नाम सामने आया था। लोगों का मानना है कि गहराई से जांच हुई तो कई और फर्जीवाड़े उजागर हो सकते हैं।


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