विभागीय परीक्षा से चयनित कर्मचारियों की पदोन्नति निरस्त करने का मामला, संघ ने फैसले पर उठाए सवाल
रायपुर, 16 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर/राज्य कर विभाग में वर्ष 2021 और 2022 की विभागीय परीक्षा के माध्यम से राज्य कर निरीक्षक पद पर चयनित 42 कर्मचारियों को करीब पांच वर्ष बाद उनके मूल पद पर वापस भेजे जाने के आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे कर्मचारियों के हितों के विपरीत बताया है।
विभागीय परीक्षा के बाद मिली थी पदोन्नति
संघ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, लिपिक वर्ग के 42 कर्मचारियों ने विभागीय परीक्षा में हिस्सा लिया था। लिखित परीक्षा सहित चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरण पूरे होने के बाद उनका चयन राज्य कर निरीक्षक के पद पर किया गया। इसके बाद चयनित कर्मचारी करीब पांच वर्षों से इसी पद पर कार्य कर रहे थे।
संघ का कहना है कि चयन प्रक्रिया में परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन, दस्तावेजों का सत्यापन, मेरिट सूची तैयार करने और नियुक्ति आदेश जारी करने जैसी प्रक्रियाएं विभागीय स्तर पर पूरी की गई थीं।
11 सितंबर के आदेश से वापस मूल पद पर भेजने का दावा
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 11 सितंबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से 42 राज्य कर निरीक्षकों की नियुक्ति/पदोन्नति प्रक्रिया को निरस्त करते हुए उन्हें उनके मूल लिपिक पद पर प्रत्यावर्तित करने का निर्णय लिया गया है।
इस फैसले के बाद संबंधित कर्मचारियों के बीच असंतोष की स्थिति बनने की बात संघ ने कही है।
“प्रक्रिया में गलती हुई तो कर्मचारियों को क्यों भुगतना पड़े”
लिपिक संघ का तर्क है कि यदि चयन प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई थी, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागीय प्रक्रिया और अधिकारियों की होनी चाहिए। संघ के अनुसार, कर्मचारियों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी और विभाग द्वारा चयनित होने के बाद लंबे समय तक राज्य कर निरीक्षक के रूप में सेवाएं दीं।
संघ ने यह भी सवाल उठाया है कि करीब पांच साल तक सेवा लेने के बाद कर्मचारियों को वापस मूल पद पर भेजने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।
संघ ने फैसले को वापस लेने की मांग की
छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 42 कर्मचारियों ने विभागीय परीक्षा के माध्यम से पद प्राप्त किया था और वर्षों तक उसी पद पर कार्य किया। उनका कहना है कि अब चयन प्रक्रिया में कथित त्रुटि का प्रभाव कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
संघ ने शासन से 11 सितंबर के निरस्तीकरण/प्रत्यावर्तन आदेश पर पुनर्विचार कर उसे वापस लेने, जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित कर्मचारियों को राहत देने की मांग की है।
आंदोलन की चेतावनी
संघ ने कहा है कि यदि मामले में शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकता है। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर संघ जल्द ही आंदोलन की घोषणा करेगा।
फिलहाल, आदेश के पीछे विभागीय स्तर पर क्या कारण रहे और चयन प्रक्रिया में किस प्रकार की त्रुटि बताई गई है, इस संबंध में संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।
जारीकर्ता:
रोहित तिवारी
प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ




