‘मरणासन्न कथन’ विषय पर बिलासपुर रेंज की ऑनलाइन कार्यशाला, विवेचना में त्रुटियां रोकने पर जोर

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गंभीर अपराधों की विवेचना मजबूत करने और सजा प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित हुई कार्यशाला

पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में बुधवार को ‘मरणासन्न कथन’ (Dying Declaration) विषय पर रेंज स्तरीय एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य गंभीर अपराधों की विवेचना को त्रुटिहीन बनाना और न्यायालयों में सजा का प्रतिशत बढ़ाना था।

“मरणासन्न कथन, कानूनी प्रक्रिया, सावधानियां और विवेचकों के लिए दिशा-निर्देश” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के विभिन्न जिलों से करीब 200 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।

पुलिस महानिरीक्षक ने कहा- छोटी त्रुटियां आरोपियों को दिला देती हैं लाभ

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने कहा कि अपराध विवेचना के दौरान आहत या पीड़ित का मृत्यु पूर्व कथन और डीएनए व भौतिक साक्ष्यों का सही संकलन अपराधियों को सजा दिलाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।

उन्होंने कहा कि विवेचना प्रक्रिया में छोटी-छोटी त्रुटियों का लाभ कई बार आरोपियों को मिल जाता है। इसी प्रकार की कमियों को दूर करने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।

शासकीय अधिवक्ता रजनीकांत ठाकुर ने दी कानूनी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी

कार्यशाला में शासकीय अधिवक्ता मुंगेली रजनीकांत ठाकुर ने ‘मरणासन्न कथन’ विषय पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल ने किया तथा रजनीकांत ठाकुर को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत मरणासन्न कथन की प्रमाणिकता पर डाला गया प्रकाश

कार्यशाला में बताया गया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 की धारा 26 के तहत मृत्युकालिक कथन एक मजबूत और महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। मजिस्ट्रेट द्वारा प्रश्नोत्तर प्रारूप में दर्ज बयान को न्यायालय में विशेष महत्व दिया जाता है।

डॉक्टर के फिटनेस प्रमाणपत्र को बताया गया अनिवार्य

विवेचकों को निर्देश दिए गए कि पीड़ित का बयान दर्ज करने से पहले और बाद में डॉक्टर से मानसिक रूप से स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है।

कार्यशाला में हालिया न्यायिक मामलों का उदाहरण देते हुए बताया गया कि प्रमाणपत्र के अभाव में उच्च न्यायालय द्वारा सजा पलटने जैसी स्थितियां भी सामने आई हैं।

विवेचकों को एफएसएल रिपोर्ट और गवाह तैयारी को लेकर दिए गए विशेष निर्देश

अभियोजन अधिकारियों ने विवेचकों को चालान पेश करते समय कॉपी-पेस्ट से बचने, एफएसएल रिपोर्ट में रक्त समूह का मिलान सुनिश्चित करने तथा एससी/एसटी एक्ट के मामलों में प्रारंभिक जांच के दौरान जातिगत शब्दों का स्पष्ट उल्लेख करने के निर्देश दिए।

साथ ही गवाहों को न्यायालय में गवाही से पहले विधिक रूप से तैयार कराने पर भी जोर दिया गया।

प्रश्नोत्तर सत्र में अधिकारियों की व्यावहारिक समस्याओं का किया गया समाधान

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को साझा किया।

इस दौरान शासकीय अधिवक्ता रजनीकांत ठाकुर ने प्रकरणों की विवेचना, प्रदर्शों की जब्ती और सैंपलिंग से संबंधित समस्याओं के समाधान पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने सफल प्रशिक्षण के लिए रजनीकांत ठाकुर को धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने कार्यक्रम का समापन किया।

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