एक रेस्क्यू, दो विभागों की अलग कहानी! किसने बचाया अशोक? पुलिस और प्रशासन की विज्ञप्तियों ने खड़े किए सवाल

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सूरजपुर। ओड़गी थाना क्षेत्र के ग्राम मांदर में 2 सितंबर को उफनती रेड नदी के बीच फंसे एक युवक को सुरक्षित बाहर निकालने के रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर अब दो अलग-अलग सरकारी दावों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस विभाग और जिला जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी विज्ञप्तियों में घटना तो एक ही है, लेकिन रेस्क्यू अभियान में प्रमुख भूमिका निभाने वाली टीम को लेकर दोनों में अलग-अलग जानकारी सामने आई है।

रेड नदी में फंसा था युवक

जानकारी के अनुसार, ग्राम मांदर निवासी अशोक नदी में मछली पकड़ने गया था। इसी दौरान अचानक नदी का जलस्तर बढ़ गया और वह बीच में चट्टाननुमा स्थान पर फंस गया। सूचना मिलने के बाद बचाव दलों को मौके पर भेजा गया और काफी प्रयास के बाद युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

पुलिस की विज्ञप्ति में एसडीआरएफ और ग्रामीणों का जिक्र

पुलिस विभाग की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि सूचना मिलने पर ओड़गी थाना पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों के सहयोग से युवक तक पहुंच बनाई गई और उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुलिस की विज्ञप्ति में थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार पुरेना सहित पुलिसकर्मियों, एसडीआरएफ टीम और स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।

प्रशासन ने डीडीआरएफ को बताया रेस्क्यू का आधार

वहीं जिला जनसंपर्क विभाग की विज्ञप्ति में इसी घटना को जिला प्रशासन की राहत एवं बचाव टीम द्वारा किए गए सफल रेस्क्यू के रूप में बताया गया है। इसके मुताबिक भैयाथान एसडीएम के माध्यम से सूचना मिलने के बाद जिला सेनानी के निर्देश पर डीडीआरएफ की संयुक्त टीम घटनास्थल पहुंची और चट्टान पर फंसे युवक को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसमें डीडीआरएफ संयुक्त टीम के प्रभारी हवलदार बीरबल गुप्ता सहित अन्य सदस्यों की भूमिका बताई गई है।

युवक के नाम को लेकर भी अलग-अलग जानकारी

दोनों आधिकारिक विज्ञप्तियों में केवल रेस्क्यू टीम को लेकर ही अंतर नहीं है, बल्कि युवक के नाम को लेकर भी अलग जानकारी सामने आई है। पुलिस की विज्ञप्ति में उसे अशोक पिता ननकू चेरवा, उम्र 30 वर्ष बताया गया है, जबकि प्रशासन की विज्ञप्ति में नाम अशोक सोनपाकर दर्ज है।

आखिर रेस्क्यू की कमान किसके पास थी?

दोनों विज्ञप्तियों को एक साथ देखने पर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि घटनास्थल पर वास्तविक रेस्क्यू अभियान किस टीम ने संचालित किया था। क्या पुलिस, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ और ग्रामीणों ने मिलकर संयुक्त रूप से युवक को बाहर निकाला था? अगर ऐसा था तो दोनों विभागों की आधिकारिक सूचनाओं में सभी टीमों की संयुक्त भूमिका स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताई गई?

श्रेय की तस्वीर अलग, उपलब्धि एक

रेस्क्यू अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि युवक की जान बच गई और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके लिए अभियान में शामिल प्रत्येक व्यक्ति और टीम का योगदान महत्वपूर्ण है। लेकिन एक ही घटना पर जारी दो सरकारी विज्ञप्तियों में अलग-अलग टीमों को प्रमुखता मिलने से अब रेस्क्यू से ज्यादा श्रेय को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

आधिकारिक सूचनाओं में एकरूपता जरूरी

ऐसे संवेदनशील मामलों में सरकारी विभागों की ओर से जारी सूचनाएं आम लोगों और मीडिया के लिए आधिकारिक तथ्य का आधार होती हैं। इसलिए घटना, पीड़ित के नाम और रेस्क्यू में शामिल टीमों की भूमिका को लेकर स्पष्ट एवं एकरूप जानकारी सामने आना जरूरी है।

फिलहाल युवक का सुरक्षित बच निकलना सबसे बड़ी राहत है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की अलग-अलग विज्ञप्तियों में सामने आए विरोधाभासों ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है कि आखिर मांदर के इस रेस्क्यू ऑपरेशन का वास्तविक नायक कौन था?

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