एनआईटी राउरकेला का बड़ा नवाचार: विमान लैंडिंग गियर के लिए विकसित हुआ अत्याधुनिक नैनोकॉम्पोज़िट मैटेरियल

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राउरकेला। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT Rourkela) के वैज्ञानिकों ने एयरोस्पेस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए विमान लैंडिंग गियर के लिए एक उन्नत और टिकाऊ एल्यूमिनियम-आधारित नैनोकॉम्पोज़िट मैटेरियल विकसित किया है। यह नई सामग्री न केवल हल्की है बल्कि पारंपरिक मिश्रधातुओं की तुलना में लगभग 65 प्रतिशत अधिक घिसाव प्रतिरोध और मजबूती प्रदान करती है।

आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ उच्च-प्रदर्शन मैटेरियल

इस शोध में कार्बन नैनोट्यूब, ग्रेफाइट नैनोप्लेटलेट्स और हेक्सागोनल बोरॉन नाइट्राइड का संयोजन किया गया है, जिससे सामग्री को बेहतर भार वहन क्षमता और तापीय स्थिरता मिली है। उच्च-आवृत्ति ध्वनि तरंगों की मदद से कणों का समान वितरण सुनिश्चित किया गया, जिससे एल्यूमिनियम मैट्रिक्स की संरचनात्मक मजबूती और कठोरता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।

इसके बाद इसे उच्च दाब और ऑक्सीजन-रहित वातावरण में सिंटरिंग प्रक्रिया से तैयार किया गया, जिससे एक सघन और मजबूत संरचना बनी, जो एयरोस्पेस उपयोग के लिए उपयुक्त है।

3D रिइंफोर्समेंट नेटवर्क से बढ़ी मजबूती

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नैनोकॉम्पोज़िट त्रि-आयामी सुदृढ़ीकरण नेटवर्क बनाता है, जो भार के समान वितरण और संरचनात्मक स्थिरता को बेहतर करता है। सतह पर बनने वाली सुरक्षात्मक परत इसके घिसाव को और कम करती है, जिससे इसकी आयु पारंपरिक सामग्रियों की तुलना में काफी बढ़ जाती है।

रक्षा और ड्रोन तकनीक में भी उपयोग की संभावना

यह मैटेरियल रक्षा विमानों और मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है, जहां हल्के वजन के साथ उच्च टिकाऊपन आवश्यक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक एयरोस्पेस संरचनाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा को नया आयाम दे सकती है।

कम लागत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

शोध के अनुसार, यह नैनोकॉम्पोज़िट मौजूदा टाइटेनियम और उच्च-शक्ति मिश्रधातुओं की तुलना में लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक अधिक किफायती साबित हो सकता है। यह भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है।

पेटेंट और आगे का शोध

शोध टीम पहले ही संबंधित तकनीक पर पेटेंट प्राप्त कर चुकी है और इस नए मैटेरियल के लिए भी पेटेंट प्रक्रिया जारी है। आने वाले चरण में बड़े आकार के एयरोस्पेस घटकों के विकास पर काम किया जाएगा।

एनआईटी राउरकेला का यह नवाचार भारत को अगली पीढ़ी की एयरोस्पेस सामग्री तकनीक में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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