बिलासपुर | राष्ट्रीय राजमार्ग-49 पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए शुरू हुई आधुनिक एम्बुलेंस सेवा
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर द्वारा अत्याधुनिक आपातकालीन चिकित्सा एम्बुलेंस सेवाओं का शुभारंभ किया गया है। इन एम्बुलेंस सेवाओं को राष्ट्रीय राजमार्ग-49 पर बिलासपुर से रायगढ़ के बीच यात्रा करने वाले लोगों की आपातकालीन सहायता के लिए पाराघाट टोल प्लाजा और केसला टोल प्लाजा में तैनात किया गया है।

हाईवे पर हर यात्री की सुरक्षा एनएचएआई की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुकेश कुमार
परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर के परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले प्रत्येक यात्री की सुरक्षा और जीवन एनएचएआई की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में राहगीरों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना विभाग का मुख्य उद्देश्य है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि हाईवे पर लंबी यात्रा पर निकलने से पहले वाहन की तकनीकी जांच जरूर कराएं और अपने मोबाइल की स्पीड डायल सूची में 1033 नंबर सेव रखें। उन्होंने कहा कि हाईवे पर किसी भी परेशानी के समय यही नंबर सबसे बड़ी मदद साबित हो सकता है।

सड़क हादसे से लेकर वाहन खराब होने तक हर समस्या में मदद करेगा डायल 1033
एनएचएआई के अनुसार टोल-फ्री डायल 1033 राष्ट्रीय राजमार्गों पर 24 घंटे सक्रिय रहने वाली सहायता सेवा है। यात्रा के दौरान वाहन का टायर पंचर होना, इंजन फेल होना, सड़क पर पेड़ गिरना, मवेशियों का आ जाना, भारी मलबा पड़े होना या किसी सह-यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ने जैसी स्थिति में इस नंबर पर तत्काल सहायता प्राप्त की जा सकती है।
इसके अलावा टोल प्लाजा, फास्टैग संबंधी समस्या या हाईवे पर असुरक्षा महसूस होने पर भी राहगीर 1033 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
कॉल मिलते ही सक्रिय होता है कंट्रोल रूम, कुछ ही मिनटों में पहुंचती है मदद
जैसे ही कोई राहगीर 1033 नंबर पर कॉल करता है, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का कॉल सेंटर तत्काल सक्रिय हो जाता है। कॉल करने वाले व्यक्ति से घटना या समस्या की सटीक लोकेशन ली जाती है और इसके बाद कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस या पेट्रोलिंग वाहन सहायता के लिए मौके पर पहुंच जाते हैं।
यदि कोई घायल होता है, तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया जाता है। वहीं अन्य तकनीकी समस्याओं की स्थिति में क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों की मदद से बाधा को जल्द दूर किया जाता है।


