अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
सरकारी RTO में ड्राइविंग टेस्ट की अनिवार्यता खत्म करने की तैयारी, मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग सेंटरों की भूमिका बढ़ेगी
रायपुर/नई दिल्ली। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को लेकर परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव की चर्चा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आवेदकों को ड्राइविंग टेस्ट के लिए अनिवार्य रूप से सरकारी RTO कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। इसके स्थान पर सरकार से मान्यता प्राप्त Accredited Driving Training Centres पर प्रशिक्षण और ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया पूरी किए जाने की व्यवस्था बताई जा रही है।
सरकार की ओर से इसका उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रशिक्षण आधारित बनाना बताया गया है। हालांकि, इस बदलाव को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि निजी प्रशिक्षण केंद्रों पर लगने वाली फीस आम आवेदकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ तो नहीं बनेगी।
RTO की लंबी कतारों से राहत का दावा
नई व्यवस्था के समर्थकों का कहना है कि इससे RTO कार्यालयों में लगने वाली लंबी कतारों को कम किया जा सकेगा। साथ ही बिचौलियों पर निर्भरता घटाने और ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया को तकनीकी निगरानी के दायरे में लाने में मदद मिल सकती है।
मान्यता प्राप्त सेंटरों पर ट्रैक और सिम्युलेटर जैसी सुविधाओं के माध्यम से आवेदकों को प्रशिक्षण देने तथा उनकी दक्षता जांचने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
सेंटरों के लिए जमीन से लेकर बायोमेट्रिक तक की शर्तें
मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई शर्तें रखी गई हैं। दोपहिया और तीन पहिया वाहनों के प्रशिक्षण के लिए कम से कम एक एकड़ तथा भारी वाहनों के प्रशिक्षण के लिए दो एकड़ जमीन और निर्धारित टेस्ट ट्रैक जैसी सुविधाओं की जरूरत होगी।
इसके अलावा प्रशिक्षण में बायोमेट्रिक उपस्थिति और आईटी आधारित निगरानी का प्रावधान भी बताया गया है। निर्धारित थ्योरी और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आवेदक को टेस्ट देना होगा। सफल होने पर प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
हालांकि, निजी केंद्रों के संचालन की लागत और प्रशिक्षण शुल्क को लेकर लोगों के बीच सवाल हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में जमीन और अन्य संसाधनों की लागत अधिक होने के कारण प्रशिक्षण शुल्क कितना होगा, यह आवेदकों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर भी बढ़ेगा शिकंजा
ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े बदलावों के साथ यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी सख्ती की बात सामने आ रही है। लगातार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के लाइसेंस पर निलंबन या निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई का प्रावधान लागू हो सकता है।
बताया जा रहा है कि यदि किसी चालक के खिलाफ एक वर्ष में पांच या उससे अधिक चालान होते हैं अथवा निर्धारित अवधि में जुर्माना जमा नहीं किया जाता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस पर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इन प्रावधानों की वास्तविक लागू स्थिति संबंधित अधिसूचना और राज्य स्तर पर लागू नियमों के अनुसार स्पष्ट होगी।
सड़क सुरक्षा सुधारना बताया जा रहा मुख्य उद्देश्य
परिवहन व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों का प्रमुख उद्देश्य प्रशिक्षित और जिम्मेदार वाहन चालक तैयार करना तथा सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना बताया जा रहा है। ड्राइविंग टेस्ट और प्रशिक्षण को अधिक व्यवस्थित करने से उन लोगों पर रोक लगाने की कोशिश है, जो पर्याप्त प्रशिक्षण के बिना वाहन चलाते हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद आम नागरिक के लिए लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया वास्तव में कितनी आसान और पारदर्शी होती है। साथ ही यह भी देखना होगा कि निजी प्रशिक्षण केंद्रों की फीस और निगरानी को लेकर सरकार किस तरह की व्यवस्था लागू करती है।


