राउरकेला (ओडिशा)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप तकनीकी शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के समावेश को लेकर बीजू पटनायक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (BPUT) में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत मंगलवार से हुई।
200 से अधिक प्राचार्य और शिक्षक हुए शामिल
कुंतला कुमारी साबत सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में ओडिशा के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के 200 से अधिक प्राचार्य और वरिष्ठ शिक्षक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का विषय “विकसित ओडिशा के लिए तकनीकी शिक्षा का रूपांतरण : एनईपी-2020 परिप्रेक्ष्य” रखा गया है।
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा पर मंथन
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तकनीकी शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करना और NEP-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुझाव तैयार करना है।
कुलपति बोले—भारत रहा है विश्व शिक्षा का केंद्र
उद्घाटन सत्र में बीपीयूटी के कुलपति प्रो. आर्य कुमार रथ ने कहा कि प्राचीन भारत विश्व शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां विदेशी विद्यार्थी ज्ञान अर्जन के लिए आते थे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है।
सरकार की प्रतिबद्धता
ओडिशा सरकार के कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव सुकांत कुमार प्रधान ने कहा कि राज्य सरकार उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
मुख्य अतिथि डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा उसे विश्वगुरु बनाती है। आधुनिक तकनीक और भारतीय ज्ञान का समन्वय शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाएगा।
देशभर के शिक्षाविदों की भागीदारी
कार्यशाला में IIT भुवनेश्वर, NIT राउरकेला, NIT नागालैंड, गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों के कुलपति और निदेशक शामिल हो रहे हैं।




