रिपोर्टर अभिषेक कुमार पाण्डेय
मंगला-छपराभाठा क्षेत्र में निगम की कार्रवाई, सार्वजनिक जगह पर मेडिकल कचरा मिलने से मचा हड़कंप
बिलासपुर। शहर के मंगला-छपराभाठा क्षेत्र में सार्वजनिक स्थान पर बायोमेडिकल वेस्ट और एक्सपायरी दवाएं पाए जाने के मामले में नगर निगम ने सख्त कार्रवाई की है। निरीक्षण के दौरान मिले मेडिकल कचरे से जुड़े दस्तावेजों और पैकेजिंग की जांच के बाद इसका संबंध श्रीराम केयर हॉस्पिटल से बताया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिक निगम ने अस्पताल प्रबंधन पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।

औचक निरीक्षण में सामने आया मामला
नगर निगम की टीम क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण कर रही थी। इसी दौरान एक खुले स्थान पर मेडिकल उपयोग की सामग्री, कचरा और एक्सपायरी दवाएं बिखरी हुई मिलीं। कचरे की स्थिति देखकर निगम की टीम ने मौके पर जांच शुरू की।
जांच के दौरान मिले रैपर, दस्तावेज और अन्य सामग्री के आधार पर मेडिकल वेस्ट को श्रीराम केयर हॉस्पिटल से जुड़ा बताया गया। इसके बाद निगम अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की।

बायोमेडिकल वेस्ट के निपटारे में नियमों का पालन जरूरी
स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटारे के लिए निर्धारित नियम हैं। ऐसे कचरे को सामान्य घरेलू कचरे की तरह खुले स्थान पर नहीं फेंका जा सकता। इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अलग-अलग श्रेणियों में एकत्र कर अधिकृत एजेंसी के माध्यम से सुरक्षित तरीके से नष्ट या निस्तारित किया जाना होता है।
खुले में मेडिकल कचरा पड़े रहने से लोगों, पशुओं और कचरा उठाने वाले कर्मचारियों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ सकता है। इस्तेमाल की गई चिकित्सकीय सामग्री और दवाओं का असुरक्षित निपटारा पर्यावरणीय दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय माना जाता है।
निगम आयुक्त के निर्देश पर लगाया गया अर्थदंड
मामले में नगर पालिक निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे के निर्देश पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ 30 हजार रुपये की कार्रवाई की गई। निगम ने भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा सामने आने पर और अधिक कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
निगम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि शहर की स्वच्छता और नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
दोबारा मामला सामने आने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
निगम अधिकारियों ने स्वास्थ्य संस्थानों को बायोमेडिकल वेस्ट के निपटारे से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, भविष्य में दोबारा इस तरह की स्थिति सामने आने पर नियमानुसार चालान के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
कार्रवाई के बाद उठे निगरानी व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने शहर में निजी स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। 30 हजार रुपये के जुर्माने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के संग्रहण और अंतिम निपटारे की व्यवस्था की नियमित जांच कितनी प्रभावी तरीके से होती है।




