एसडीएम की बड़ी कार्रवाई, करगीकला हल्का 24 का मामला, तहसील में अटैच, रजिस्ट्री निरस्त करने की तैयारी
मरवाही/जीपीएम जमीन घोटाले में लिप्त मरवाही के एक पटवारी पर गाज गिरी है। फर्जी फौती नामांतरण कर भूमाफिया को पैतृक संपत्ति दिलाने के आरोप में एसडीएम मरवाही ने पटवारी रविन्द्र कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच में पटवारी की मिलीभगत प्रथम दृष्टया प्रमाणित होने के बाद यह कार्रवाई की गई ग्राम करगीकला हल्का नंबर 24 के निवासी सावन सिंह एवं तीन अन्य लोगों ने कलेक्टर जीपीएम के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में बताया गया कि उनकी पैतृक जमीन को भूमाफिया ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फौती नामांतरण कर किसी अन्य व्यक्ति के नाम चढ़ा लिया। इसके बाद उस जमीन की रजिस्ट्री भी करा ली गई। अब शेष बची जमीन को भी बेचने की तैयारी चल रही थी। पीड़ित परिवार ने दोषी पटवारी और भूमाफिया पर एफआईआर दर्ज कर रजिस्ट्री निरस्त करने की मांग की थी।कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम मरवाही ने मामले की जांच कराई।
जांच प्रतिवेदन में पटवारी रविन्द्र कश्यप की भूमिका संदिग्ध पाई गई। पाया गया कि बिना वैध दस्तावेजों के, बिना वारिसों की जानकारी लिए फौती नामांतरण कर दिया गया। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए निलंबन आदेश जारी किया गया।निलंबन आदेश के मुताबिक पटवारी रविन्द्र कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय मरवाही नियत किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
सूत्रों के मुताबिक राजस्व विभाग अब इस फर्जीवाड़े में शामिल भूमाफिया की पहचान कर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। साथ ही फर्जी नामांतरण के आधार पर हुई रजिस्ट्री को निरस्त करने के लिए न्यायालय में प्रतिवेदन भेजा जाएगा। मामले में तत्कालीन तहसीलदार और रजिस्ट्री कार्यालय की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि पीड़ित परिवार की पूरी जमीन का खसरा, बी-1 और नक्शा खंगाला जा रहा है। यह पता लगाया जा रहा है कि कितनी जमीन फर्जी तरीके से बेची जा चुकी है और कितनी शेष है।




