अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़
सुबह से दोपहर तक बंद रहेंगे प्रतिष्ठान, व्यापारियों ने कहा—चंदा देंगे तो स्वेच्छा से, दबाव में नहीं
बिलासपुर। शहर में कथित जबरिया चंदा वसूली को लेकर व्यापारियों का विरोध अब सामूहिक आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। चंदा वसूली के दौरान दबाव, धमकी और मारपीट के आरोपों को लेकर व्यापारिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों ने 23 सितंबर को सुबह से दोपहर तक प्रतिष्ठान बंद रखने का निर्णय लिया है। बंद के जरिए जबरिया चंदाखोरी के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराने की बात कही गई है।
प्रेस क्लब में व्यापारिक संगठनों ने की घोषणा
बिलासपुर प्रेस क्लब में शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कैट के राष्ट्रीय सचिव राजू सलूजा और छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नवदीप सिंह अरोरा ने बाजार बंद की घोषणा की।
व्यापारी नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में चंदा वसूली के नाम पर कुछ लोग व्यापारियों पर कथित रूप से दबाव बना रहे हैं। उनके मुताबिक, कई मामलों में व्यापारियों की इच्छा के विरुद्ध चंदा मांगे जाने और विरोध करने पर विवाद या मारपीट की स्थिति बनने की शिकायत सामने आई है। कुछ व्यापारियों द्वारा इस संबंध में पुलिस में शिकायत और एफआईआर दर्ज कराने की बात भी कही गई।
चंदा देना है तो स्वेच्छा से, दबाव में नहीं
व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि धार्मिक, सामाजिक या अन्य आयोजनों के लिए अपनी इच्छा से सहयोग करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि समस्या तब उत्पन्न होती है, जब दुकान पर पहुंचकर दबाव बनाकर चंदा मांगा जाता है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि सहयोग राशि व्यापारी की इच्छा और आर्थिक क्षमता के अनुसार होनी चाहिए। किसी प्रकार के दबाव या धमकी के जरिए चंदा वसूली को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासन के सामने भी उठाया जाएगा मुद्दा
कैट और चेंबर की स्थानीय इकाई ने जबरिया चंदा वसूली के खिलाफ अभियान चलाने का निर्णय लिया है। व्यापारियों का कहना है कि पूरे मामले से प्रशासन को भी अवगत कराया जाएगा और चंदा वसूली के नाम पर होने वाले कथित दबाव एवं विवाद पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की जाएगी।
बाजार बंद कर एकजुटता दिखाएंगे व्यापारी
व्यापारियों के अनुसार 23 सितंबर का बंद केवल प्रतिष्ठान बंद रखने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि जबरिया चंदाखोरी के खिलाफ व्यापारिक समुदाय की सामूहिक एकजुटता का संदेश भी होगा। उनका कहना है कि लंबे समय से अलग-अलग व्यापारियों को इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए अब सामूहिक रूप से आवाज उठाने का निर्णय लिया गया है।
व्यापारियों ने दो टूक कहा कि वे सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन चंदा केवल स्वेच्छा से दिया जाएगा, किसी दबाव या जबरदस्ती के आधार पर नहीं।




