रुदावली में ‘कागजी विकास’ का बड़ा खेल उजागर, लाखों के मनरेगा घोटाले का आरोप – जांच के नाम पर खानापूर्ति से भड़के ग्रामीण

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रुदावली पंचायत में विकास के नाम पर बड़ा खेल, शपथ पत्र देकर ग्रामीणों ने खोली घोटाले की परतें

माधौगढ़ (जालौन) के विकास खंड नदीगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत रुदावली में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। 12 शिकायतकर्ताओं ने शपथ पत्र देकर इंटरलॉकिंग, नाली और बंधा निर्माण में लाखों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।


बंधा निर्माण कागजों में पूरा, मौके पर नहीं मिला कोई काम – जांच की भनक लगते ही दिखावा शुरू

ग्रामीणों का आरोप है कि बंधा निर्माण का कार्य केवल कागजों में दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कोई निर्माण नहीं हुआ। जांच की सूचना मिलते ही 2–3 दिन पहले आनन-फानन में मजदूर लगाकर काम का दिखावा करने की कोशिश की गई, जिससे पूरे मामले में गंभीर गड़बड़ी की आशंका और गहरी हो गई है।


इंटरलॉकिंग-नाली में अनियमितताएं, एक ही काम के लिए दो बार भुगतान का आरोप

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इंटरलॉकिंग और नाली निर्माण में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। कई जगह एक ही कार्य के लिए दो-दो बार भुगतान किया गया, जबकि कई कार्य अधूरे पड़े हैं। कहीं इंटरलॉकिंग पर मिट्टी डाल दी गई तो कहीं नाली निर्माण अधर में छोड़ दिया गया, लेकिन कागजों में पूर्ण कार्य दिखाकर राशि निकाल ली गई।


एपीओ और तकनीकी सहायक पर उठे सवाल, बिना स्टीमेट-आईडी के भुगतान का आरोप

मामले में एपीओ और तकनीकी सहायक (टीए) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि बिना स्टीमेट तैयार किए और बिना आईडी जनरेट किए ही भुगतान कर दिया गया। इससे मनरेगा तंत्र की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


तीन बार जांच के बावजूद कार्रवाई नहीं, इस बार भी अधूरी जांच कर लौटे अधिकारी

ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की पहले भी तीन बार जांच हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में जांच के लिए पहुंचे जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, मंडलीय प्राधिकरण टीएसी के हिम मुहम्मद शाह आलम और कोषाधिकारी विजय शर्मा ने भी शिकायतों के बावजूद केवल एक-दो कार्यों की ही जांच की और अधूरी जांच छोड़कर लौट गए।


10–12 कार्यों की शिकायत, फिर भी सीमित जांच – मामले को दबाने की आशंका

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब 10–12 कार्यों की शिकायत की गई थी, तो जांच सीमित क्यों रखी गई। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। गांव में अंबेडकर मार्ग जर्जर स्थिति में है और नाली निर्माण अधूरा पड़ा है, लेकिन कागजों में सभी कार्य पूर्ण दिखाए जा रहे हैं।


प्रधान-सचिव ने आरोपों से किया इंकार, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की

ग्राम प्रधान जाकिर हुसैन और सचिव रोहित कुमार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी कार्य नियमों के अनुसार कराए गए हैं। हालांकि लगातार शिकायतों और जांच के बावजूद कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

 

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