इस परियोजना के लिए विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने 11 लाख रुपये की मंजूरी दी है। निर्माण कार्य पारंपरिक शैली में किया जा रहा है, जिससे धाम की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक महत्व को दर्शाया जा सके।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
कर्णेश्वर धाम को क्षेत्र का एक प्रमुख आस्था केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा कर्णराज द्वारा कराया गया था। हर साल यहां माघ पूर्णिमा मेला और सावन महोत्सव जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे यह स्थान धार्मिक के साथ-साथ पर्यटन दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है।

आधारभूत सुविधाओं का होगा विस्तार
ट्रस्ट अध्यक्ष विकल गुप्ता के अनुसार, धाम परिसर में आगे और विकास कार्य किए जाएंगे। करीब 7 लाख रुपये की लागत से शौचालय निर्माण और डूगरु मंच के सामने शेड लगाने की भी योजना है, जिसका काम जल्द शुरू होगा। इन सुविधाओं से श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।
पुरातत्व विभाग ने की साफ-सफाई
हाल ही में पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर परिसर की साफ-सफाई कराई गई है, जिससे परिसर पहले से अधिक स्वच्छ और आकर्षक नजर आ रहा है। इससे आने वाले पर्यटकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
स्थानीयों में खुशी का माहौल
प्रवेश द्वार निर्माण और अन्य विकास कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। उनका मानना है कि इन प्रयासों से कर्णेश्वर धाम को एक आदर्श धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में नई पहचान मिलेगी।
