बिलासपुर के ट्रैफिक को मिलेगी बड़ी राहत, रतनपुर से चांटीडीह तक बनेगा वैकल्पिक मार्ग

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40 करोड़ रुपये के प्रस्ताव से 10 साल पुरानी सड़क का होगा कायाकल्प, 5.50 मीटर से बढ़ाकर 7 मीटर चौड़ी की जाएगी सड़क

बिलासपुर। रतनपुर की ओर से बिलासपुर आने वाले वाहनों को शहर के भीतर भारी ट्रैफिक से बचाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। चांटीडीह से सिंघरी, लखराम और पोंसरा होते हुए सीपत चौक और रतनपुर तक सड़क के उन्नयन एवं चौड़ीकरण के लिए करीब 40 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद करीब एक दशक पुरानी और वर्तमान में लगभग 5.50 मीटर चौड़ी सड़क को 7 मीटर चौड़ी टू-लेन सड़क में विकसित करने की योजना है। इससे रतनपुर की ओर से आने वाले वाहनों को शहर के व्यस्त हिस्सों में प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा।

पैचवर्क की जगह स्थायी समाधान की तैयारी

बताया गया है कि यह सड़क लंबे समय से मरम्मत और पैचवर्क के भरोसे संचालित हो रही है। सड़क की खराब स्थिति और बढ़ते यातायात को देखते हुए अब इसके स्थायी उन्नयन की योजना बनाई गई है।

प्रस्तावित सड़क के विकसित होने के बाद चांटीडीह, सिंघरी, लखराम और पोंसरा सहित आसपास के क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

प्रस्तावित स्वरूप—

  • वर्तमान चौड़ाई करीब 5.50 मीटर
  • प्रस्तावित चौड़ाई 7 मीटर
  • टू-लेन सड़क का निर्माण
  • अनुमानित लागत करीब 40 करोड़ रुपये
  • चांटीडीह से पोंसरा, सीपत चौक और रतनपुर तक बेहतर कनेक्टिविटी

बढ़ते शहरी विस्तार से बढ़ा यातायात का दबाव

खमतराई और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आवासीय एवं व्यावसायिक विस्तार हुआ है। बड़ी संख्या में कॉलोनियां, स्कूल और औद्योगिक गतिविधियां विकसित होने के कारण इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी बढ़ी है।

स्थानीय स्तर पर करीब 40 से 50 आवासीय कॉलोनियों और हजारों लोगों की आवाजाही का उल्लेख किया गया है। ऐसे में वैकल्पिक मार्ग बनने से मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सीपत रोड पर भी घट सकता है दबाव

प्रस्तावित मार्ग का एक उद्देश्य रतनपुर और आसपास से आने वाले यातायात को शहर के व्यस्त हिस्सों से अलग वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है। सड़क का चौड़ीकरण और उन्नयन होने के बाद वाहन चालक चांटीडीह-पोंसरा मार्ग का इस्तेमाल कर सकेंगे।

हालांकि, इस परियोजना का वास्तविक प्रभाव निर्माण पूरा होने और यातायात व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

शासन की मंजूरी का इंतजार

पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर आर.के. रात्रे के अनुसार, सड़क के उन्नयन और चौड़ीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर सहित आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

उत्तरी बाईपास के लिए जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक

इधर, बिलासपुर में एनएच-130 पर प्रस्तावित 4-लेन उत्तरी बाईपास को लेकर प्रशासन ने भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। करीब 20.921 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित बाईपास का एलाइनमेंट सेंधरी, रमतला, बिरकोना, नगोई, बिजौर, मोपका, दोमुहानी और ढेका सहित कई गांवों से होकर गुजरना प्रस्तावित है।

बताया गया है कि इस परियोजना के लिए कुल 644 खसरों से संबंधित भूमि प्रभावित क्षेत्र में आ रही है। भू-अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले जमीन की अवैध प्लॉटिंग, छोटे-छोटे हिस्सों में बंटवारे और खरीद-फरोख्त की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने एलाइनमेंट में आने वाली जमीनों पर अंतरिम रोक लगाई है।

प्रशासन के अनुसार अंतिम भू-अधिग्रहण प्रक्रिया और संबंधित अधिसूचना जारी होने तक इन जमीनों के खरीद-फरोख्त, नामांतरण और बंटवारे पर रोक लागू रहेगी।

दोनों परियोजनाओं को शहर की भविष्य की यातायात व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर चांटीडीह-पोंसरा मार्ग के चौड़ीकरण से वैकल्पिक कनेक्टिविटी विकसित करने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर उत्तरी बाईपास के लिए भूमि संबंधी प्रक्रिया को नियंत्रित किया जा रहा है।

अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

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