राउरकेला, 31 जुलाई 2026। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने फाइबर-रीइनफोर्स्ड पॉलिमर (FRP) कंपोजिट की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ाने वाली उन्नत 3-डी रीइनफोर्स्ड एडवांस्ड कंपोजिट टेक्नोलॉजी के लिए पेटेंट हासिल किया है। इस तकनीक को एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोग किया जा सकेगा।
पेटेंट तकनीक से मजबूत और हल्के मटेरियल का विकास
एनआईटी राउरकेला के मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग विभाग की एफआरपी कंपोजिट प्रयोगशाला में किए गए शोध के आधार पर यह तकनीक विकसित की गई है। इस शोध दल में सहायक प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार प्रस्ती, प्रोफेसर प्रो. बंकिम चंद्र राय, शोधार्थी परिमल जाना तथा एमएनआईटी जयपुर के डॉ. दिनेश कुमार राठौड़ शामिल रहे।
इस तकनीक को पेटेंट संख्या 596943 प्रदान किया गया है।
ग्लास फाइबर और ग्राफीन से तैयार हुआ 3-डी हाइब्रिड कंपोजिट
शोधकर्ताओं ने ग्लास फाइबर और ग्राफीन नैनोप्लेटलेट्स के संयोजन से एक ऐसा 3-डी हाइब्रिड कंपोजिट विकसित किया है, जिसकी आंतरिक संरचना अधिक मजबूत और टिकाऊ है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान 800 वोल्ट, 50 हर्ट्ज एसी विद्युत क्षेत्र का उपयोग कर ग्राफीन कणों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया गया।
यह तकनीक मौजूदा कंपोजिट निर्माण प्रक्रियाओं में मामूली बदलाव के साथ अपनाई जा सकती है।
कई क्षेत्रों में होगा उपयोग
यह उन्नत मटेरियल विमान के पैनल, ऑटोमोबाइल क्रैश संरचनाओं, पवन टरबाइन ब्लेड, प्रेशर वेसल, समुद्री संरचनाओं और अन्य हाई-परफॉर्मेंस इंजीनियरिंग क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है।
डॉ. राजेश कुमार प्रस्ती ने बताया कि यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां हल्के लेकिन अधिक मजबूत और क्षति-सहनशील मटेरियल की आवश्यकता होती है।
परीक्षण में मिले बेहतर परिणाम
ASTM मानकों के अनुसार किए गए परीक्षणों में विकसित कंपोजिट में कई महत्वपूर्ण सुधार पाए गए—
- तन्य शक्ति में 37 प्रतिशत वृद्धि
- फ्लेक्सुरल शक्ति में 30 प्रतिशत सुधार
- फ्लेक्सुरल मॉड्यूलस में 63 प्रतिशत वृद्धि
- तन्य मॉड्यूलस में 26 प्रतिशत सुधार
- इंटरलैमिनर शीयर शक्ति में 24 प्रतिशत सुधार
- मोड-I फ्रैक्चर टफनेस में 33 प्रतिशत वृद्धि
- मोड-II फ्रैक्चर टफनेस में 53 प्रतिशत वृद्धि
- 40°C पर स्टोरेज मॉड्यूलस में 55 प्रतिशत वृद्धि
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा
प्रोफेसर बंकिम चंद्र राय ने कहा कि यह नवाचार मजबूत और हल्के मटेरियल के विकास के माध्यम से अनुरक्षण लागत कम करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और सतत विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद करेगा। यह तकनीक भारत के आत्मनिर्भर भारत मिशन को भी मजबूती प्रदान कर सकती है।
शोध दल अब इस तकनीक का वास्तविक आकार की संरचनाओं में परीक्षण और दीर्घकालिक पर्यावरणीय टिकाऊपन का मूल्यांकन करने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही इसे उद्योगों तक पहुंचाने के लिए लाइसेंसिंग और औद्योगिक सहयोग की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।




