केंद्रीय जल आयोग की मध्यस्थता में समाधान की राह खुली, 8 साल पुराने विवाद के खत्म होने की बढ़ी उम्मीद
भुवनेश्वर। महानदी जल विवाद (Mahanadi Water Dispute) के समाधान की दिशा में बड़ी पहल सामने आई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने ओडिशा के उस प्रस्ताव पर सहमति जताई है, जिसमें केंद्रीय जल आयोग (CWC) की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की बात कही गई थी।
न्यायाधिकरण में छत्तीसगढ़ ने रखा सकारात्मक रुख
महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (MWDT) में 11 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ ने कहा कि वह केंद्रीय जल आयोग की मध्यस्थता में आपसी सहमति से समाधान तलाशने के लिए तैयार है। न्यायाधिकरण ने छत्तीसगढ़ सरकार को अगली सुनवाई से पहले अपना रुख लिखित रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
ओडिशा ने रखा था बातचीत का प्रस्ताव
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर न्यायिक प्रक्रिया के बजाय बातचीत के माध्यम से विवाद खत्म करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस मामले में मध्यस्थता की अपील की थी।
प्रस्ताव में जल शक्ति मंत्रालय के मार्गदर्शन में केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के तकनीकी अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाने का सुझाव दिया गया था, ताकि नियमित संवाद के जरिए समाधान निकाला जा सके।
गर्मियों में जल उपलब्धता को लेकर रहा विवाद
महानदी जल विवाद (Mahanadi Water Dispute) को लेकर ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी के ऊपरी हिस्से में बनाए गए बैराज और बांधों के कारण नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ा, जिससे गर्मियों के दौरान ओडिशा में जल संकट की स्थिति बनी।
वहीं, दोनों राज्यों के बीच पिछले आठ वर्षों में लगभग 50 तकनीकी और प्रशासनिक बैठकें हो चुकी हैं। जून माह में नई दिल्ली में हुई विशेषज्ञों की बैठकों के बाद समाधान की दिशा में नई उम्मीद जगी है।
समाधान की उम्मीद बढ़ी
ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने छत्तीसगढ़ की सहमति को सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों राज्यों के बीच केंद्रीय जल आयोग की मध्यस्थता में होने वाली बातचीत से लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद का स्थायी समाधान निकल सकेगा।




