सनातन धर्म के सबसे बड़े उत्सवों में शामिल है पुरी की रथयात्रा, लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं दर्शन के लिए
पुरी। ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 आज से शुरू हो रही है। सनातन धर्म के सबसे पवित्र और भव्य धार्मिक उत्सवों में शामिल यह यात्रा हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आरंभ होती है। यह उत्सव भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा निकलते हैं नगर भ्रमण पर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मुख्य मंदिर से बाहर आते हैं। इसके बाद तीनों देवी-देवता भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं।
यह यात्रा करीब 3 किलोमीटर लंबी होती है, जहां भगवान सात दिनों तक विश्राम करते हैं।
बिना कील और धातु के बनाए जाते हैं विशाल रथ
पुरी की Jagannath Rath Yatra की सबसे खास बात इसके तीन विशाल रथ हैं। इन रथों का निर्माण हर वर्ष नए सिरे से पूरी तरह लकड़ी से किया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार इनके निर्माण में किसी भी प्रकार की कील या धातु का उपयोग नहीं किया जाता।
तीनों रथों की विशेष पहचान
रथयात्रा में भगवान बलभद्र का रथ सबसे आगे चलता है, जिसे ‘तालध्वज’ कहा जाता है। इसका रंग लाल और हरा होता है।
इसके बाद देवी सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ या ‘पद्मरथ’ होता है, जिसे नीले और काले रंग से सजाया जाता है।
सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का विशाल रथ ‘नंदिघोष’ या ‘गरुड़ध्वज’ चलता है, जो लाल और पीले रंग से सुसज्जित होता है।
प्रेम, समानता और भक्ति का संदेश देती है यात्रा
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, समानता और समर्पण का प्रतीक है। इस अवसर पर जाति, धर्म और वर्ग का भेद समाप्त हो जाता है और लाखों श्रद्धालु एक साथ भगवान के रथ की रस्सी खींचते हैं।
श्रद्धालु मानते हैं कि रथ को खींचने और भगवान के दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में होगा आयोजन
रथयात्रा का संचालन श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA), छत्तीस निजोग और विभिन्न अनुष्ठान समितियों द्वारा किया जाता है। इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सेवा, भक्ति और समर्पण की अनूठी परंपरा मानी जाती है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से इस यात्रा में शामिल होने वालों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।


