डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, रायगढ़ पुलिस ने 5 आरोपी दबोचे

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भीलवाड़ा में दबिश देकर महिला समेत मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 1.40 करोड़ की ठगी का खुलासा

रायगढ़। छत्तीसगढ़ की रायगढ़ पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर देशभर में करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राजस्थान के भीलवाड़ा में दबिश देकर एक महिला सहित मास्टरमाइंड समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अब तक देशभर में करीब 1.40 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी कर चुका है।

सेवानिवृत्त अधिकारी को बनाया निशाना, 36.97 लाख की ठगी

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि इस गिरोह ने रायगढ़ के सेवानिवृत्त विद्युत पर्यवेक्षक नरेंद्र ठाकुर को निशाना बनाते हुए उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी का भय दिखाया। आरोपियों ने खुद को टेलीकॉम विभाग, सीबीआई और फर्जी पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से दबाव बनाया और कुल 36.97 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

तकनीकी जांच से खुला पूरा नेटवर्क, पीड़ित के 2 लाख रुपए होल्ड

पीड़ित की शिकायत के बाद साइबर सेल ने तकनीकी विश्लेषण शुरू किया, जिसके आधार पर बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल को ट्रेस करते हुए आरोपी भीलवाड़ा तक पहुंच गए। त्वरित कार्रवाई में पुलिस ने पीड़ित के लगभग 2 लाख रुपए होल्ड कराने में भी सफलता हासिल की।

बैंक कर्मचारी और वेब डेवलपर चला रहे थे पूरा नेटवर्क

जांच में गिरोह की संरचना बेहद संगठित और शातिर पाई गई। मुख्य आरोपी राहुल व्यास बंधन बैंक में कार्यरत कर्मचारी है, जिसे बैंकिंग सिस्टम की जानकारी का दुरुपयोग करते हुए इस गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया है। वहीं आरती राजपूत एक प्रोफेशनल वेब डेवलपर है, जो तकनीकी सहायता उपलब्ध कराती थी। इसके अलावा रविराज सिंह, संजय मीणा और गौरव व्यास भी इस नेटवर्क में सक्रिय पाए गए।

मोबाइल, लैपटॉप और बैंक खातों से बड़े खुलासे

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और कई संदिग्ध बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय था और डिजिटल माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बनाता था।

एसएसपी की चेतावनी—डिजिटल अरेस्ट पूरी तरह फर्जी

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर डराकर पैसे नहीं मांगती। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर घबराएं नहीं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

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