NDPS मामले में हाईकोर्ट सख्त, DGP से मांगा शपथ पत्र; जांच अधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल

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बिलासपुर। एनडीपीएस एक्ट से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और जांच अधिकारी की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी करते हुए पूरे मामले में विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मामला बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में 2,925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) गोलियों की बरामदगी से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा किया गया है कि महिला को पारिवारिक विवाद के चलते कथित साजिश के तहत मामले में फंसाया गया। याचिका में पुलिस की कार्रवाई, बरामदगी की परिस्थितियों और जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

जांच अधिकारी की भूमिका पर हाईकोर्ट की नजर

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि जिस पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज की और जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई, उसी अधिकारी को आगे मामले की जांच करने और चार्जशीट पेश करने की जिम्मेदारी कैसे दी गई।

कोर्ट ने इस बिंदु को गंभीरता से लेते हुए DGP से विस्तृत जवाब मांगा है। साथ ही जांच अधिकारी शैलेंद्र सिंह के पूर्व आचरण और उनके खिलाफ उपलब्ध जानकारी के संबंध में भी व्यक्तिगत शपथ पत्र के माध्यम से जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

छत पर मिला था दवाओं से भरा बैग

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, जिस पॉलीथिन बैग में कथित प्रतिबंधित दवाएं मिलीं, वह महिला से सीधे बरामद नहीं हुआ था। परिवार का दावा है कि करीब 14 वर्षीय नाबालिग बच्चा पतंग उड़ाते समय घर की छत पर गया था, जहां उसे यह बैग मिला।

बताया गया कि बच्चे ने मोबाइल फोन के माध्यम से दवाओं के संबंध में जानकारी जुटाई और बाद में अपनी मां को इसकी जानकारी दी। परिवार के अनुसार बैग में क्या है, इसकी जानकारी नहीं होने के कारण उसे अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे वाली जगह पर रख दिया गया था।

नाबालिग को थाने में बैठाने का आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि करीब 14 वर्षीय बच्चे के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होने के बावजूद उसे पुलिस थाने ले जाया गया और करीब 10 घंटे तक वहां बैठाकर रखा गया।

याचिकाकर्ताओं ने बच्चे के मोबाइल फोन को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए उसकी फोरेंसिक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मोबाइल में दवाओं के संबंध में की गई सर्च से मामले की वास्तविक परिस्थितियों पर प्रकाश पड़ सकता है।

दवाओं के स्रोत की जांच की मांग

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि कथित प्रतिबंधित दवाएं कहां से आईं, पॉलीथिन बैग को घर की छत तक कौन लेकर आया और उसे वहां किसने रखा।

इसके अलावा महिला की गिरफ्तारी की परिस्थितियों और उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

24 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए DGP को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। संबंधित अधिकारी को भी अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अथवा अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित रहने को कहा गया है।

अब 24 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर पुलिस की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब और शपथ पत्र पर नजर रहेगी। कोर्ट के निर्देश के बाद कथित नशीली दवाओं की बरामदगी के साथ-साथ जांच अधिकारी की भूमिका और पूरी जांच प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है।

अभिषेक कुमार पाण्डेय
संवाददाता, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

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