मुआवजा फाइलों पर अब प्रशासन की पैनी नजर, लू से मौत के 6 मामलों में 24 लाख की जांच

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अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा प्रकरण में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच बिलासपुर जिला प्रशासन ने अब लू से मौत के नाम पर वितरित किए गए मुआवजे के मामलों की भी पड़ताल शुरू कर दी है। प्रशासन ने ऐसे 6 प्रकरणों की फाइल दोबारा खंगालने का निर्णय लिया है। प्रत्येक प्रकरण में 4 लाख रुपये की मुआवजा राशि स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है। इस हिसाब से इन छह मामलों में कुल 24 लाख रुपये की राशि की जांच होगी।

मृत्यु प्रमाण पत्र से बैंक खाते तक होगी जांच

प्रशासन अब केवल रिकॉर्ड में दर्ज मृत्यु के कारण तक सीमित नहीं रहेगा। जांच में मृत्यु प्रमाण पत्र, पात्रता संबंधी दस्तावेज, मृत्यु के कारण की पुष्टि, मुआवजा स्वीकृति की प्रक्रिया और संबंधित बैंक खातों में राशि के लेन-देन की भी पड़ताल की जाएगी।

आंकड़ों में अंतर से बढ़ी चिंता

लू से मौत के मामलों की संख्या में सामने आए अंतर ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। उपलब्ध रिकॉर्ड में अलग-अलग वर्षों में लू से मौत के मामलों की संख्या में अंतर दिखाई दिया है। अब प्रशासन यह सत्यापित करेगा कि इन छह मामलों में मृत्यु का वास्तविक कारण क्या था और लू से मौत की पुष्टि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुई थी या नहीं।

हालांकि आंकड़ों में अंतर अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन सर्पदंश मुआवजा मामले की जांच के बीच प्रशासन ने इन फाइलों की जांच को गंभीरता से लिया है।

चार-चार लाख रुपये की पात्रता कैसे तय हुई?

जांच में प्रत्येक प्रकरण के दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी। प्रशासन यह देखेगा कि मृत्यु प्रमाण पत्र में क्या कारण दर्ज है, लू से मौत की पुष्टि किस स्तर पर हुई और मुआवजा स्वीकृत करने से पहले कौन-कौन से दस्तावेजों की जांच की गई।

इसके अलावा संबंधित परिवार की पात्रता और मुआवजा राशि किस बैंक खाते में जमा हुई, इसकी भी जांच की जाएगी।

सर्पदंश प्रकरण के बाद बढ़ी निगरानी

सर्पदंश मुआवजा प्रकरण में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद सरकारी राहत एवं मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पर प्रशासन की निगरानी बढ़ गई है। इसी क्रम में दूसरे मुआवजा प्रकरणों की फाइलों की भी जांच की जा रही है।

सर्पदंश मुआवजा मामले में कथित तौर पर गलत तरीके से मुआवजा हासिल किए जाने के आरोपों की जांच जारी है। ऐसे में प्रशासन अब अन्य मामलों में भी दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की सत्यता जांच रहा है।

7 तहसीलदार और 5 लिपिकों को नोटिस

सर्पदंश मुआवजा प्रकरण की जांच में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इसी बीच 7 तहसीलदार और 5 लिपिकों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच में संबंधित अधिकारियों की भूमिका, मुआवजा स्वीकृति की प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन की स्थिति की भी पड़ताल की जा रही है।

कागजों और वास्तविक स्थिति का होगा मिलान

लू मुआवजा प्रकरण में प्रशासन दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का वास्तविक परिस्थितियों से मिलान करेगा। मृत्यु प्रमाण पत्र में दर्ज कारण के साथ अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रमाणों की जांच की जाएगी।

इसके बाद बैंक खातों में भुगतान की भी पड़ताल होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी राशि वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक पहुंची है।

गड़बड़ी मिली तो होगी कार्रवाई

प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जांच में यदि किसी प्रकरण में गलत तरीके से या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा हासिल करने की बात सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर

सर्पदंश मुआवजा प्रकरण के बाद लू से मौत के छह मामलों की जांच ने प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। फिलहाल इन मामलों में किसी अनियमितता को जांच पूरी होने से पहले साबित नहीं माना जा सकता। प्रशासन दस्तावेजों, पात्रता और बैंक लेन-देन की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा।

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