एमसीबी: चिरमिरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने वीआईपी संस्कृति को लेकर बड़ा संदेश दिया. प्रधानमंत्री के सादगी और अनावश्यक वीआईपी कल्चर खत्म करने के आह्वान के बाद मंत्री ने अपने काफिले में चलने वाली पायलट और फॉलो गाड़ियों को लेकर अहम फैसला लेते हुए घोषणा की कि अब उनके साथ रोजाना पायलट और फॉलो वाहन नहीं चलेंगे.
“अब काफिले में सिर्फ एक गाड़ी”
चिरमिरी के लाहिड़ी कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि जनता की सुविधा और अनावश्यक सरकारी खर्च को कम करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि अब केवल एक वाहन ही उनकी गाड़ी के साथ चलेगा, जबकि पायलट और फॉलो वाहन का उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों, सुरक्षा जरूरतों या अति महत्वपूर्ण दौरों के दौरान किया जाएगा.
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच सादगी के साथ रहना चाहिए और अनावश्यक तामझाम से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार वीआईपी संस्कृति को कम करने और जनता से सीधा जुड़ाव बढ़ाने की बात करते रहे है. ऐसे में जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे इस दिशा में पहल करें और जनता के सामने उदाहरण प्रस्तुत करें.
उन्होंने कहा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार होना चाहिए, न कि दिखावे के लिए. मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि यदि आम जनता को किसी व्यवस्था से परेशानी होती है, तो उस व्यवस्था की समीक्षा होना जरूरी है.
मंत्री की घोषणा के बाद ताली बजाकर लोगों ने किया स्वागत
मंत्री की घोषणा के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया. बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने इसे सकारात्मक और जनता के हित में लिया गया फैसला बताया. कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों का कहना था कि अक्सर वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों को ट्रैफिक जाम, रास्ता रोकने और आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में यदि मंत्री का यह फैसला जमीनी स्तर पर लागू होता है तो आम जनता को काफी राहत मिल सकती है.

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल
स्थानीय लोगों ने कहा कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान कई बार एंबुलेंस, स्कूली बच्चे और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोग घंटों प्रभावित होते हैं। ऐसे में यदि पायलट और फॉलो गाड़ियों की संख्या कम होती है तो ट्रैफिक व्यवस्था पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.

