अंबिकापुर, 26 जून 2026। कृषि विज्ञान केंद्र सरगुजा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में किसानों को हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और मिट्टी की उर्वरता में सुधार करना है।
🌾 ढैंचा, सनई और मूंग से होगा मिट्टी का सुधार
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने बताया कि ढैंचा, सनई और मूंग जैसी दलहनी फसलों को 40–45 दिन में खेत में पलटकर हरित खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। ये फसलें नाइट्रोजन स्थिरीकरण के जरिए मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाती हैं।
💰 रासायनिक उर्वरकों पर घटेगी निर्भरता
डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि यह प्रक्रिया प्रति हेक्टेयर लगभग 50–55 किलोग्राम नाइट्रोजन उपलब्ध कराती है, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है और रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम होती है।
🌿 खेती की लागत कम, उत्पादन ज्यादा
हरित खाद से मिट्टी की संरचना, जल धारण क्षमता और सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि और भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित होती है।
👨🌾 किसानों से अपील
वैज्ञानिकों ने किसानों से खरीफ बुवाई से पहले हरित खाद अपनाने की अपील की, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन और स्वस्थ मिट्टी सुनिश्चित हो सके।


