खरसिया वन परिक्षेत्र अंतर्गत तेंदूपत्ता खरीदी कार्य का आज विधिवत शुभारंभ किया गया। तेंदूपत्ता, जिसे वनांचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और “हरा सोना” कहा जाता है, ग्रामीण एवं वनवासी परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आय का प्रमुख स्रोत है।
खरसिया रेंज में खरीदी कार्य की शुरुआत वन परिक्षेत्र अधिकारी श्रीमती लीला पटेल के मार्गदर्शन में की गई। इस दौरान खरसिया सर्किल प्रभारी विजय कुमार दीक्षित के नेतृत्व में तेंदूपत्ता फड़ों का संयुक्त निरीक्षण भी किया गया।
निरीक्षण टीम में परिसर रक्षक रानीसागर श्रीमती संतोषी पटेल, परिसर रक्षक बसनाझर श्रीमती प्रीति तिवारी तथा अन्य वन अमला शामिल रहा। इसके अलावा देहजारी फड़ पर परिसर रक्षक तनिष सिदार द्वारा भी व्यवस्थाओं की निगरानी की गई।
निरीक्षण के दौरान रानीसागर, सरायपाली, बसनाझर, आधाझर एवं गिधा फड़ों का मौके पर जाकर बारीकी से जायजा लिया गया। अधिकारियों ने फड़ों पर तेंदूपत्ता संग्रहण व्यवस्था, तौल प्रक्रिया, गुणवत्ता जांच, भंडारण व्यवस्था तथा मजदूरों की उपस्थिति की स्थिति का विस्तृत निरीक्षण किया।

इसके साथ ही भुगतान प्रक्रिया, रजिस्टर संधारण, फड़ संचालन में पारदर्शिता एवं रिकॉर्ड मेंटेनेंस की भी जांच की गई, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी की संभावना न रहे।
अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि तेंदूपत्ता खरीदी कार्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए और मजदूरों को समय पर उचित लाभ मिले।
तेंदूपत्ता को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में इस समय व्यापक उत्साह देखने को मिल रहा है, क्योंकि यह हर वर्ष हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार बनता है। इसी कारण इसे “हरा सोना” कहा जाता है, जो सीधे जंगल से जुड़ी आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है।


