गरियाबंद। जिले के छुरा क्षेत्र में पटवारी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। हल्का नंबर 31 में पदस्थ पटवारी राजेश मांडले पर किसानों से नामांतरण, सीमांकन और नक्शा सुधार जैसे सामान्य राजस्व कार्यों के बदले मोटी रकम मांगने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है।
राजस्व कार्यों के लिए भी कथित वसूली, किसान दबाव में
स्थानीय किसानों का कहना है कि छोटे-छोटे कामों के लिए भी भारी रिश्वत मांगी जा रही है। कई किसानों ने मजबूरी में पैसे देने की बात स्वीकार की है, जबकि कुछ किसान अब भी डर के कारण खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। उनका आरोप है कि शिकायत करने पर उनके काम रोक दिए जाते हैं और भविष्य में और ज्यादा परेशान किया जाता है।
“बिना पैसे फाइल आगे नहीं बढ़ती” — किसानों का दर्द
पीड़ित किसानों के मुताबिक, “काम कराने के लिए पैसा देना पड़ता है, नहीं तो फाइल आगे नहीं बढ़ती।” इस स्थिति ने ग्रामीणों के बीच भय और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है।
जनप्रतिनिधियों ने भी उठाया मुद्दा, जांच की मांग तेज
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जनप्रतिनिधियों ने सुशासन शिविर में खुले मंच से पटवारी की कथित रिश्वतखोरी का मुद्दा उठाया। कुछ आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि वसूली गई रकम ऊपर तक पहुंचाई जाती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हालिया निलंबन के बाद भी जारी शिकायतें
गौरतलब है कि हाल ही में छुरा क्षेत्र के एक अन्य पटवारी को रिश्वत और “ठंडी बीयर” मांगने के आरोप में निलंबित किया गया था। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही शिकायतें प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं।
बढ़ता आक्रोश, कार्रवाई की मांग
लगातार सामने आ रहे आरोपों के बीच अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा और किसानों को राहत मिलेगी, या फिर भ्रष्टाचार का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।
फिलहाल छुरा क्षेत्र में किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।


