लोगों, अधिकार और न्यायपूर्ण समाज पर परिचर्चा में बुद्धिजीवियों ने उठाए शहर के ज्वलंत सवाल
रायगढ़। लोगों, अधिकार और न्यायपूर्ण समाज की अवधारणा को केंद्र में रखकर रायगढ़ में ‘संवाद से समता’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। पूर्व ब्यूरोक्रेट हर्ष मंदर की उपस्थिति में आयोजित जन संवाद में देश के मौजूदा सामाजिक एवं राजनीतिक हालात के साथ-साथ रायगढ़ से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। शहर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, पत्रकारों और विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव और चिंताएं साझा कीं। इस दौरान रायगढ़ में बढ़ते अनियंत्रित एवं अव्यवस्थित औद्योगिकीकरण, पर्यावरणीय संकट और आम नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठे।

औद्योगिक विकास के बीच पर्यावरण और जनजीवन पर चिंता
परिचर्चा में रायगढ़ के औद्योगिक विकास और उसके प्रभाव पर गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण, स्वास्थ्य, रोजगार, विस्थापन और आम नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। औद्योगिक विस्तार के बीच बढ़ती प्रदूषण की समस्या, हवा में धूल और पर्यावरणीय असंतुलन को लेकर प्रतिभागियों ने चिंता व्यक्त की।

प्रदूषण को जनस्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों से जोड़ा
जन संवाद में प्रदूषण को केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय न मानकर जनस्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से संबंधित सवाल के रूप में रखा गया। चर्चा के दौरान औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव से लोगों में विभिन्न गंभीर बीमारियों को लेकर चिंता जताई गई। विशेष रूप से कैंसर जैसी घातक बीमारियों के बढ़ते खतरे और पर्यावरणीय प्रदूषण के बीच संभावित संबंधों पर गंभीर विमर्श हुआ।

वक्ताओं ने कहा कि इस विषय पर भावनात्मक चर्चा के साथ वैज्ञानिक अध्ययन, स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों और स्वतंत्र पर्यावरणीय निगरानी को भी सामने लाया जाना जरूरी है।
औद्योगिक घरानों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल
परिचर्चा में औद्योगिक घरानों की जिम्मेदारी, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए गए। चर्चा में यह बात सामने आई कि उद्योग और शहर के विकास के बीच संतुलन जरूरी है, ताकि आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज को मिले और उसकी कीमत आम नागरिकों को स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के नुकसान के रूप में न चुकानी पड़े।
जिला प्रशासन द्वारा हाल ही में कई औद्योगिक क्षेत्रों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने पर भी परिचर्चा में नाराजगी व्यक्त की गई।
विकास किसके लिए और किस कीमत पर? उठे अहम सवाल
जन संवाद में रायगढ़ के मौजूदा विकास मॉडल पर भी विस्तार से विचार किया गया। तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार, यातायात, प्रदूषण, बुनियादी सुविधाओं और पर्यावरणीय दबाव के बीच यह सवाल उठाया गया कि आखिर विकास किसके लिए और किस कीमत पर हो रहा है।
प्रतिभागियों ने कहा कि शहर के विकास की योजना तैयार करते समय स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
शहर के विभिन्न वर्गों ने अपने अनुभव और चिंताएं रखीं
परिचर्चा में शिक्षाविद रामचंद्र शर्मा, डॉ. राजू अग्रवाल, विश्लेषक एवं चिंतक मनीष सिंह, शिक्षाविद अबरार हुसैन, वरिष्ठ पत्रकार विनय पांडेय, कामरेड युवराज सिंह आजाद, कामरेड गणेश कच्छवाहा, वासुदेव शर्मा, अनिल अग्रवाल चीकू, आदिवासी नेता हृदयराम राठिया और सामाजिक कार्यकर्ता सविता रथ समेत बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहे।
सभी ने रायगढ़ की मौजूदा परिस्थितियों, औद्योगिक विकास, प्रदूषण, सामाजिक सरोकारों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को अपने-अपने दृष्टिकोण से सामने रखा।
सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी हुआ संवाद
कार्यक्रम में देश के वर्तमान सामाजिक और लोकतांत्रिक हालात पर भी चर्चा हुई। लोगों के अधिकार, सामाजिक न्याय, समानता, लोकतांत्रिक मूल्यों और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज को संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
वक्ताओं ने अपने अनुभवों के आधार पर वर्तमान परिस्थितियों पर विचार रखते हुए कहा कि समाज में संवाद की संस्कृति मजबूत किए बिना समतामूलक व्यवस्था की कल्पना संभव नहीं है।
हर्ष मंदर ने सुनीं लोगों की बातें, विभिन्न मुद्दों पर किया संवाद
हर्ष मंदर ने परिचर्चा में मौजूद प्रतिभागियों की बातें सुनीं और विभिन्न मुद्दों पर संवाद किया। कार्यक्रम का स्वर एकतरफा भाषण के बजाय प्रश्न, अनुभव, चिंता और विचारों के आदान-प्रदान पर केंद्रित रहा। रायगढ़ की स्थानीय समस्याओं से लेकर देश की वर्तमान परिस्थितियों तक विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम का संचालन जन चेतना के राजेश त्रिपाठी ने किया।
आम आदमी, अधिकार और सुरक्षित भविष्य को केंद्र में रखने पर जोर
परिचर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि विकास तभी सार्थक माना जा सकता है, जब उसके केंद्र में आम आदमी, उसका अधिकार, स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षित भविष्य हो। रायगढ़ जैसे तेजी से औद्योगिक विस्तार वाले शहर में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन तथा नागरिकों की भागीदारी को लेकर संवाद को आगे बढ़ाने की आवश्यकता भी महसूस की गई।




