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केंद्र सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे सौतेले व्यवहार को लेकर केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के 13 हजार कैडर अधिकारियों में अपने समयबद्ध पदोन्नति ना होने से भारी रोष व्याप्त जिसमें सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, सेकेंड इन कमांड, कमांडेंट, डीआईजी व आईजी रैंक के सीनियर पदाधिकारी शामिल हैं।

- महासचिव रणबीर सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 23 मई 2025 को अपने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के कैडर अधिकारियों को ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस दर्जा देने का आदेश सुनाया जिसमें समयबद्ध पदोन्नति व अलग अलग फेस में आईपीएस अधिकारियों की संख्या में कमी v अन्य सेवा शर्तों में बेहतरी के लिए बदलाव।

- लेकिन वाह री राष्ट्रभक्त सरकार सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को पलटने के लिए विधाई हस्तक्षेप के तहत एक जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2026 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं जिसके कारण केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के तमाम अधिकारियों में अपने भविष्य को लेकर बैचेनी बनी हुई है जहां अगले प्रमोशन के लिए 15-20 सालों तक लंबा इंतजार। जहां तक पदोन्नति का सवाल है लोअर रैंक सिपाही, हवलदार, सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर का भी यही हाल जिनको एक रैंक से दूसरे प्रमोशन के लिए 15 से 20 सालों तक लंबा उबाऊ इंतजार करना पड़ रहा है

- जिसके चलते हर साल तकरीबन 10 हजार जवान व अधिकारी नौकरी से त्यागपत्र या स्वेच्छा से वॉलेंटियर रिटायरमेंट ले रहे हैं और ये सिलसिला पिछले 20 सालों से बदस्तूर जारी है। पूर्व एडीजी सीआरपीएफ श्री एचआर सिंह के कहे अनुसार अब जंतर मंतर के सिवाय जाएं कहां। एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में पूर्व अर्धसैनिकों व उनके परिवारो को भारी संख्या में 23 मार्च को जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन में भागीदारी की अपील किया।
