गौरेला में बेखौफ सट्टा सिंडिकेट: चिंटू भट्टाटोला के अवैध कारोबार ने उड़ाईं सरकारी दावों की धज्जियां

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राज्य सरकार के जुआ और सट्टा मुक्त अभियान के बावजूद, गौरेला नगर में सट्टेबाजी का अवैध व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सरगना ‘चिंटू भट्टाटोला वाला’ है। शहर के विभिन्न गली-मोहल्लों और दर्जनों दुकानों पर बेहिचक सट्टे की पर्चियां लिखी जा रही हैं। इस धंधे में नाबालिग बच्चों से लेकर बेरोजगार युवाओं तक को धकेला जा रहा है, जिससे इलाके का सामाजिक माहौल खराब हो रहा है।

मुख्य संचालक और नेटवर्क: इस अवैध कारोबार का नेतृत्व ‘चिंटू भट्टाटोला वाला’ कर रहा है, जिसका नेटवर्क पूरे गौरेला शहर में फैला हुआ है।

युवाओं और नाबालिगों पर प्रभाव: इस खेल में सबसे ज्यादा नुकसान स्थानीय नाबालिगों और बेरोजगार युवाओं का हो रहा है, जिन्हें आसानी से इस लत का शिकार बनाया जा रहा है।

भ्रष्टाचार और पुलिस-प्रशासन पर सवाल: सट्टा लिखने वाले एजेंटों द्वारा खुलेआम यह दावा किया जा रहा है कि “पैसा ऊपर तक और सभी विभागों में जाता है।” यह बयान कानून-व्यवस्था और स्थानीय पुलिस की भूमिका को कटघरे में खड़ा करता है।

सरकारी दावों की जमीनी हकीकत: राज्य सरकार की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की नीतियां गौरेला में पूरी तरह से विफल नजर आ रही हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है।

अहम सवाल:
क्या स्थानीय पुलिस और प्रशासन इस खुलेआम चल रहे अवैध कारोबार पर कोई ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई करेगा, या ‘हिस्सेदारी’ के आरोपों को मूक सहमति देकर इस खबर को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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