यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर जोर, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 26 ट्रेनों में एलएचबी कोच

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अभिषेक कुमार पाण्डेय

रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

आधुनिक तकनीक वाले एलएचबी कोच से बढ़ी संरक्षा और आराम, अधिक बर्थ मिलने से कन्फर्म सीट की संभावना भी बेहतर

बिलासपुर, 12 सितंबर 2026। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और बेहतर रेल यात्रा उपलब्ध कराने के लिए ट्रेनों में आधुनिक तकनीक वाले एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच को लगातार बढ़ावा दे रहा है। पुराने आईसीएफ कोचों की जगह चरणबद्ध तरीके से एलएचबी कोच लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से संचालित 26 ट्रेनों के 34 रैक एलएचबी कोच से लैस हैं।

मजबूत डिजाइन से बेहतर हुई रेल यात्रा

एलएचबी कोच आधुनिक तकनीक और मजबूत संरचना के साथ तैयार किए गए हैं। इनमें यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बेहतर डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है। इन कोचों में आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम होने के कारण सफर के दौरान झटके और कंपन अपेक्षाकृत कम महसूस होते हैं।

कोचों की बेहतर स्थिरता और आधुनिक संरचना तेज गति से ट्रेन संचालन के लिए भी अनुकूल मानी जाती है। इससे यात्रियों को सुरक्षित होने के साथ अपेक्षाकृत अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलता है।

इन ट्रेनों में उपलब्ध है एलएचबी कोच

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की बिलासपुर-भगत की कोठी, बिलासपुर-बीकानेर, बिलासपुर-बक्सर, बिलासपुर-एर्णाकुलम, बिलासपुर-चेन्नई, बिलासपुर-पुणे, रायपुर-कोरबा, बिलासपुर-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, दुर्ग-निजामुद्दीन संपर्कक्रांति, दुर्ग-जम्मूतवी, दुर्ग-नौतनवा, दुर्ग-कानपुर, दुर्ग-अजमेर, दुर्ग-ऊधमपुर, दुर्ग-निजामुद्दीन हमसफर, दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस, रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी, कोरबा-इतवारी शिवनाथ एक्सप्रेस, बिलासपुर-नागपुर इंटरसिटी, बिलासपुर-रीवा, बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, बिलासपुर-येलहंका, दुर्ग-अंबिकापुर और अंबिकापुर-शहडोल ट्रेनों में एलएचबी कोच की सुविधा उपलब्ध है।

एलएचबी कोच में ज्यादा बर्थ

एलएचबी कोचों का एक प्रमुख फायदा इनकी अधिक यात्री क्षमता है। सामान्य आईसीएफ स्लीपर कोच में जहां 72 बर्थ होती हैं, वहीं एलएचबी स्लीपर कोच में 80 बर्थ उपलब्ध रहती हैं।

इसी तरह आईसीएफ एसी-3 कोच में 64 की तुलना में एलएचबी एसी-3 कोच में 72 बर्थ तथा आईसीएफ एसी-2 कोच में 46 की तुलना में एलएचबी एसी-2 कोच में 62 बर्थ उपलब्ध होती हैं।

इस अतिरिक्त क्षमता से अधिक यात्रियों के लिए बर्थ उपलब्ध कराने में मदद मिलती है और कन्फर्म बर्थ मिलने की संभावना भी बढ़ती है।

1999 में भारतीय रेलवे में शामिल हुए एलएचबी कोच

एलएचबी कोच का नाम जर्मनी की कंपनी लिंक हॉफमैन बुश के नाम पर पड़ा है। भारतीय रेलवे में इन कोचों का इस्तेमाल वर्ष 1999 से शुरू हुआ था। वर्तमान में इनका निर्माण कपूरथला स्थित रेलवे कोच फैक्ट्री में किया जाता है।

आधुनिक डिजाइन, मजबूत संरचना, बेहतर सस्पेंशन, अधिक यात्री क्षमता और आरामदायक यात्रा जैसी विशेषताओं के कारण भारतीय रेलवे में एलएचबी कोचों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।

संरक्षित रेल यात्रा को प्राथमिकता

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीक और यात्री सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। एलएचबी कोच इसी प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने में सहायक साबित हो रहे हैं।

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