DNA रिपोर्ट ने खोला पितृत्व का राज, हाई कोर्ट ने सीपत निवासी पिता को 3 साल के बेटे के लिए ₹5 हजार मासिक देने का दिया आदेश

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में डीएनए रिपोर्ट के आधार पर बच्चे के पितृत्व की पुष्टि होने के बाद उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी जैविक पिता पर तय की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने सीपत निवासी व्यक्ति को 3 वर्षीय बच्चे के लालन-पालन के लिए 1 सितंबर 2026 से हर महीने 5 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।

तिफरा में हुई थी महिला और युवक की मुलाकात

मामले के अनुसार, महिला तिफरा क्षेत्र की एक दुकान में सेल्सगर्ल के रूप में काम करती थी। इसी दौरान उसकी पहचान सीपत चौक के पास दुकान संचालित करने वाले युवक से हुई। महिला का आरोप था कि युवक ने उसकी मांग में सिंदूर भरकर उसे पत्नी के रूप में स्वीकार किया और उसके साथ संबंध बनाए।

बच्चे के जन्म के बाद युवक ने पितृत्व से किया इनकार

महिला ने 16 जून 2022 को बेटे को जन्म दिया। इसके बाद युवक ने बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया। महिला को बाद में पता चला कि युवक पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं।

DNA जांच में सामने आया सच

मामला पुलिस और बाद में फैमिली कोर्ट तक पहुंचा। पुलिस जांच के दौरान कराई गई डीएनए जांच में युवक को बच्चे का जैविक पिता पाया गया। यही रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष मामले में अहम साक्ष्य बनी।

फैमिली कोर्ट के फैसले में हाई कोर्ट ने किया संशोधन

फैमिली कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को महिला और बच्चे की भरण-पोषण याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद महिला ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल की।

हाई कोर्ट ने माना कि महिला के भरण-पोषण का मामला अलग हो सकता है, लेकिन बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार स्वतंत्र है। बच्चे को माता-पिता के आपसी विवाद का नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

1 सितंबर से हर महीने ₹5 हजार देने का आदेश

अदालत ने फैमिली कोर्ट के आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए सीपत निवासी जैविक पिता को 1 सितंबर 2026 से प्रतिमाह 5 हजार रुपये बच्चे के भरण-पोषण के लिए देने का निर्देश दिया।

अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर
छत्तीसगढ़

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