जिला कांग्रेस की प्रेसवार्ता: वक्ताओं ने कहा— मोदी सरकार शिक्षा व्यवस्था खत्म कर रही, NEET पेपर लीक पर उठाए गंभीर सवाल

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने प्रेसवार्ता आयोजित कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र की नीतियों के कारण देश की शिक्षा व्यवस्था (Education System) लगातार कमजोर हो रही है और लाखों छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है।

NEET पेपर लीक पर शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग

प्रेसवार्ता में पूर्व विधायक डॉ. के.के. ध्रुव ने केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार आवाज उठाने और सड़कों पर संघर्ष करने के बाद ही सरकार को नीट परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लेना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में करीब 22 लाख छात्रों और उनके परिवारों के साथ धोखा हुआ है तथा बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया गया है।

मानसिक तनाव से छात्रों की मौत का मुद्दा उठाया

कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह बघेल ने कहा कि नीट पेपर लीक (NEET Leak) से उत्पन्न मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 12 छात्रों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सरकार की नीतियों से प्रेरित हत्या मानती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 23 राष्ट्रीय परीक्षाओं सहित 89 से अधिक पेपर लीक के मामले सामने आए, लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले बेहद कम रहे।

शिक्षा बजट में कटौती और जांच की मांग

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष दया वाकरे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा बजट (Education Budget) को आधा कर दिया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है।
वहीं जिला महामंत्री राकेश मसीह ने सीबीआई (CBI) से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई।

NTA को भंग कर नई पारदर्शी संस्था बनाने की मांग

जिला उपाध्यक्ष नारायण शर्मा ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा संचालन में पूरी तरह विफल साबित हुई है। कांग्रेस का आरोप है कि NTA को भंग कर एक नई और पारदर्शी संस्था का गठन किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।
जिला उपाध्यक्ष कमाल खान ने भी केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताई।

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