वर्ष 2015 से 2026 तक स्वीकृत कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस भूमि की होगी जांच, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
रायगढ़, 5 सितंबर 2026। जिले में स्वीकृत कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए निर्धारित भूमि के प्रावधानों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर वर्ष 2015 से 2026 तक स्वीकृत कॉलोनियों की व्यापक जांच शुरू की जा रही है। इसमें ईडब्ल्यूएस भूमि के आरक्षण से लेकर नामांतरण, मौके की स्थिति, उपयोग और भूखंडों की बिक्री तक के रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी।
मौके और सरकारी रिकॉर्ड का होगा मिलान
कलेक्टर के निर्देश पर रायगढ़ एसडीएम, नगर पालिक निगम रायगढ़ के आयुक्त तथा जिले के सभी नगर पालिका एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करने के साथ शासकीय अभिलेखों से उसका मिलान करना होगा। उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश रायगढ़ को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।
प्रशासन ने प्रत्येक कॉलोनी की अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अधिकारियों को 15 दिनों की समय-सीमा दी गई है।
ईडब्ल्यूएस भूखंड वास्तव में सुरक्षित हैं या नहीं, होगी पड़ताल
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि स्वीकृत ले-आउट में ईडब्ल्यूएस के लिए निर्धारित भूमि मौके पर मौजूद है या नहीं। इसके अलावा निर्धारित भूखंडों का नियमानुसार उपयोग हुआ या नहीं, पात्र हितग्राहियों को भूखंड उपलब्ध कराए गए अथवा अन्य लोगों को बेच दिए गए, इसका भी परीक्षण होगा।
भूमि का नामांतरण सक्षम प्राधिकारी या संबंधित नगरीय निकाय के पक्ष में हुआ है अथवा नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। जहां ईडब्ल्यूएस भूमि आरक्षित नहीं मिली या नियमों के अनुरूप स्थिति नहीं पाई गई, वहां इसके लिए जिम्मेदार पक्ष की भी पहचान की जाएगी।
2015 से शुरू हुई जांच, पुराने रिकॉर्ड भी खुलेंगे
प्रशासन की जांच सूची में वर्ष 2015 से स्वीकृत कॉलोनियों को शामिल किया गया है। वर्ष 2015 के मामलों में मेसर्स गणपती रियालिटी सक्ती की लामीदरहा स्थित कॉलोनी तथा संजय भूषण पाण्डेय और दीपक अग्रवाल की ग्राम सहसपुर स्थित कॉलोनी में स्वीकृत प्रावधानों के पालन की जांच होगी।
वर्ष 2016 में श्री केशव टाउनशीप प्राइवेट लिमिटेड की बोईरदादर तथा शौर्य प्रोपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की बड़े रामपुर स्थित कॉलोनी के ईडब्ल्यूएस भूमि एवं नामांतरण संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
2017 से 2022 तक के कई प्रकरण जांच के दायरे में
वर्ष 2017 में आकर्षण बिल्डर्स की जगतपुर, मेसर्स एलायंस डेवलपर्स की छातामुड़ा, श्री भाटिया वाटिका की मिट्ठूमुड़ा तथा पी.जी. इंटरप्राइसेस की बड़े अतरमुड़ा स्थित कॉलोनी जांच सूची में है।
वर्ष 2019 के प्रकरणों में बड़े अतरमुड़ा में दया सागर मिश्रा, बेन्द्राचुंआ में श्री सांई ग्रुप तथा बड़े रामपुर में शौर्य प्रोपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की कॉलोनियों के ईडब्ल्यूएस भूमि, आश्रय शुल्क और नामांतरण संबंधी रिकॉर्ड देखे जाएंगे।
वर्ष 2020 में बड़े अतरमुड़ा स्थित दया सागर मिश्रा एवं हलधर चौधरी के प्रकरणों के साथ छोटे अतरमुड़ा की मेसर्स जय मां दुर्गा डेवलपर्स तथा गोवर्धनपुर की मेसर्स वैद्यनाथ बिल्डर्स की कॉलोनियां भी जांच में शामिल हैं।
वर्ष 2021 में हरप्रीत इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की घरघोड़ा और कसैया क्षेत्र की कॉलोनियों के अलावा सुकुलभठली में रजत अग्रवाल, पंडरीपानी में एपेक्स रियल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड तथा अमलीभौना में मेसर्स टियान्स बिल्डर्स के प्रकरणों की जांच होगी।
2022-23 में बड़ी संख्या में कॉलोनियां जांच सूची में
वर्ष 2022 के प्रकरणों में अमलीभौना स्थित बी.आर. एसोसिएट एवं मेसर्स टियान्स बिल्डर्स, ग्राम छींच में सिमर इंटरप्राइसेस, बेन्द्राचुंआ में श्री सांई ग्रुप, गोवर्धनपुर में श्री केशव टाउनशीप प्राइवेट लिमिटेड तथा छातामुड़ा में श्रीराम प्रोपर्टीज की कॉलोनियां शामिल हैं।
वर्ष 2023 में छातामुड़ा की मेसर्स महालक्ष्मी, बोईरदादर की श्री साईं कृपा, छोटे अतरमुड़ा के अमोलक सिंह, कसैया-घरघोड़ा के बजरंग अग्रवाल एवं अन्य, बोईरदादर की मेसर्स आशियाना इस्टैट, बड़े रामपुर के ओम साईं बिल्डर्स और एपेक्स रियल इंफ्रा सहित कई प्रकरणों की जांच होगी।
इसी वर्ष बड़े अतरमुड़ा में हाईटेक बिल्डर्स, अमलीभौना में आर.आर. डेवलपर्स एवं टियान्स बिल्डर्स, मिट्ठूमुड़ा में गुरूकृपा इन्फ्रा एलायंस, कौहाकुंडा में श्री सांई ग्रुप, छातामुड़ा-सहदेवपाली में अग्रसेन रियल स्टेट प्राइवेट लिमिटेड, बड़े अतरमुड़ा में श्याम बिल्डकॉन एवं अभिषेक अग्रवाल तथा घरघोड़ा में रंजीत भाटिया के प्रकरण भी जांच के दायरे में रखे गए हैं।
2024 से 2026 तक की नई कॉलोनियों पर भी नजर
वर्ष 2024 में बोईरदादर के अनिल गोयल, जोरापाली के श्री सांई आनंद विहार, बेलादुला के रूपचंद अग्रवाल, बड़े रामपुर के ओम साईं बिल्डर्स, मिट्ठूमुड़ा के एच.पी. डेवलपर्स, सांगीतराई के मेसर्स टियान्स बिल्डर्स, अमलीभौना के आर.आर. डेवलपर्स, बेलादुला के शंकर अग्रवाल और बड़े अतरमुड़ा के पी.जी. इंटरप्राइसेस के प्रकरणों में 9 प्रतिशत विकसित भूखंड और ईडब्ल्यूएस प्रावधानों की स्थिति देखी जाएगी।
वर्ष 2025 के मामलों में बेलादुला में एलायंस डेवलपर्स, विजयपुर में श्री सांई आनंद विहार, छोटे अतरमुड़ा में श्याम डेवलपर्स, बड़े अतरमुड़ा में कैलाश अग्रवाल एवं हाईटेक बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, दरोगामुड़ा में नितिन गोयल तथा दरोगामुड़ा और कोसमनारा में बालाजी डेवलपर्स की कॉलोनियां शामिल हैं।
वर्ष 2026 की नवीनतम स्वीकृत कॉलोनियों में कौहाकुंडा के बालाजी प्रोजेक्ट्स, विजयपुर में सालासार बिल्डकॉन, सुरेश रोहड़ा, नीरज अग्रवाल और दीपक एक्का के प्रकरणों की जांच होगी। सांगीतराई में टियांश कैपिटल सिटी फेस-3/टियांश बिल्डकॉन के मामले में ईडब्ल्यूएस भूमि के नामांतरण की स्थिति भी जांची जाएगी।
तथ्य सामने आने के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया है कि ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आरक्षित भूमि का उद्देश्य पात्र और जरूरतमंद परिवारों को नियमानुसार लाभ पहुंचाना है। स्वीकृत कॉलोनियों में निर्धारित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
प्रशासन द्वारा अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कर तथ्यात्मक जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।




