रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के तहत जिले में लगभग 12 करोड़ 14 लाख 85 हजार रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य आदिवासी, ग्रामीण एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों में (DMF विकास कार्य), (ग्रामीण सड़क), (सौर ऊर्जा) और (आधारभूत संरचना) को मजबूत करना है।
ग्रामीण सड़कों से जुड़ेगा दूरस्थ अंचल, आवागमन होगा सुगम
स्वीकृत परियोजनाओं के तहत सात महत्वपूर्ण (ग्रामीण सड़क) निर्माण कार्य शामिल हैं। इन सड़कों के बनने से धरमजयगढ़, लैलूंगा और तमनार विकासखंड के कई गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इससे कृषि उपज, वनोपज और स्थानीय उत्पादों के परिवहन में तेजी आएगी, साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच भी आसान होगी।
इन सड़कों में कटाईपाली सी से पुसल्दा, औरानारा से वृंदावन (दो भाग), सुबरा से कटकलिया, राजपुर मंडी से बथानपारा, बनई से चारभांठा और चिर्रामुड़ा से बनाई मार्ग शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनजातीय परिवारों के लिए सौर ऊर्जा की बड़ी सौगात
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) परिवारों के लिए (आदिवासी विकास) के तहत (सौर ऊर्जा) आधारित योजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है। धरमजयगढ़ के गिधकालो मजराटोला में 108 सोलर होम लाइट संयंत्र लगाए जाएंगे, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
इसके अलावा प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत खदान प्रभावित ग्राम कुम्हीचुआ में 27 घरों में सोलर रूफटॉप ग्रिड सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इन योजनाओं से आदिवासी और दूरस्थ गांवों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर
जिला प्रशासन ने सभी परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। हर कार्य स्थल पर सूचना फलक लगाना, नियमित फोटोग्राफी, भौतिक सत्यापन और मासिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य की गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इन (विकास परियोजनाओं) के माध्यम से जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में समग्र विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।



