देवपहरी कन्या छात्रावास में सात वर्षीय छात्रा की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

परिजनों और ग्रामीणों ने लापरवाही के आरोप लगाए, छात्रावास प्रबंधन के कथन से भी उठे कई सवाल; निष्पक्ष जांच की मांग

देवपहरी/कोरबा। देवपहरी स्थित कन्या छात्रावास में सात वर्षीय छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद हुई मौत से छात्रावास की स्वास्थ्य व्यवस्था और बच्चों की देखरेख को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने छात्रावास प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

तबीयत बिगड़ने के बाद छात्रा को पालक के सुपुर्द करने का दावा

परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि छात्रा की हालत लगातार बिगड़ रही थी। उनके अनुसार स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि बच्ची के मुंह और जुबान की गतिविधि प्रभावित होने जैसी स्थिति दिखाई दे रही थी। आरोप है कि ऐसी स्थिति में उसे तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय बाद में पालक के सुपुर्द कर दिया गया।

मामले में यह सवाल उठ रहा है कि यदि छात्रा की हालत गंभीर थी तो उसे तत्काल चिकित्सक के पास ले जाने अथवा अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई।

अधीक्षक ने बताई अलग स्थिति

छात्रावास अधीक्षक विभा साहू के अनुसार, वह सप्ताह में दो दिन छात्रावास में उपस्थित रहती हैं और बाकी समय अपनी पांच वर्षीय बेटी के साथ रहती हैं। उनके मुताबिक छात्रा की तबीयत अचानक खराब होने की जानकारी उन्हें स्कूल की शिक्षिका ने फोन के माध्यम से दी थी।

अधीक्षक का कहना है कि सूचना मिलने के बाद उन्होंने बच्ची को छात्रावास लाने के लिए कहा। छात्रावास पहुंचने पर उसे पैरासिटामोल, सिट्रीजिन समेत अन्य दवाएं दी गईं और राहत पहुंचाने का प्रयास किया गया।

उन्होंने यह भी बताया कि बच्ची की तबीयत पहले भी बीच-बीच में खराब होती थी। अधीक्षक के अनुसार, पांचवें दिन जब वह छात्रावास पहुंचीं तो बच्ची के माता-पिता/पालक को बुलाकर उसे उनके सुपुर्द कर दिया गया।

गंभीर हालत में चिकित्सकीय जांच हुई या नहीं, जांच का विषय

अधीक्षक के इस कथन के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल छात्रा को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर सामने आया है। यदि बच्ची की स्थिति ऐसी थी कि भोजन करने या निगलने में भी परेशानी की आशंका थी, तो क्या उस समय चिकित्सक से उसकी जांच कराई गई थी?

ग्रामीणों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाली छोटी बच्चियां अपने परिवार से दूर रहती हैं। ऐसे में बीमारी की गंभीर स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है।

महिला कर्मचारी के कथित बयान पर भी सवाल

मामले में छात्रावास की एक महिला कर्मचारी के कथित बयान की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि बच्ची की हालत देखकर उसे पोहा खिलाने में भी कर्मचारी को इस बात की चिंता थी कि भोजन गले में न अटक जाए।

यदि यह बात जांच में सही पाई जाती है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि ऐसी स्थिति में छात्रा को चिकित्सकीय जांच के लिए तत्काल क्यों नहीं भेजा गया।

छात्रावास की स्वास्थ्य व्यवस्था की जांच जरूरी

घटना के बाद छात्रावास में रहने वाली अन्य छात्राओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि छात्रावास में छात्राओं की नियमित स्वास्थ्य जांच की क्या व्यवस्था है और किसी छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ने पर आपातकालीन उपचार के लिए क्या प्रोटोकॉल लागू है।

साथ ही प्राथमिक उपचार, दवाइयों के रिकॉर्ड, अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क और आपात स्थिति में छात्राओं को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की भी जांच की जानी चाहिए।

घटना की पूरी टाइमलाइन खंगालने की जरूरत

मामले की निष्पक्ष जांच के दौरान छात्रा की तबीयत खराब होने से लेकर उसे पालक के सुपुर्द किए जाने और उसके बाद उपचार तक की पूरी घटनाक्रम की समय-रेखा सामने लाना महत्वपूर्ण होगा।

इसके लिए छात्रावास का उपस्थिति रजिस्टर, छात्रा से संबंधित स्वास्थ्य रिकॉर्ड, दवाइयों का विवरण, स्कूल शिक्षिका द्वारा दी गई सूचना, पालक को सौंपे जाने से संबंधित जानकारी, चिकित्सकीय दस्तावेज और घटना के समय मौजूद कर्मचारियों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।

जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी

सात वर्षीय छात्रा की मौत बेहद संवेदनशील मामला है। ऐसे में किसी व्यक्ति या अधिकारी को सीधे दोषी ठहराने के बजाय प्रशासनिक जांच के जरिए पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक पड़ताल जरूरी है।

जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही, निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन या समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराने की बात सामने आती है, तो उसके आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

फिलहाल छात्रा की मौत ने छात्रावास में स्वास्थ्य एवं आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। इन सवालों का जवाब निष्पक्ष और विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

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