147 पृष्ठों की संशोधित पुस्तिका में कई योजनाओं का उल्लेख, लेकिन मदिरा एवं कैंटीन सुविधा संबंधी जानकारी नहीं होने पर जताई नाराजगी
नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा हाल ही में सेवारत, सेवानिवृत्त जवानों तथा शहीदों के आश्रितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित 147 पृष्ठों की संशोधित पुस्तिका जारी की गई है। इस पुस्तिका में शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास, जोखिम निधि, वेटरन सेल, कावा गतिविधियां, नई पेंशन योजना, साइबर सुरक्षा और विभिन्न राज्यों द्वारा शहीद परिवारों को दी जाने वाली सहायता जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल की गई हैं। हालांकि, Central Liquor Management System (CLMS) और कैंटीन सुविधा से जुड़ी जानकारी शामिल नहीं होने पर पूर्व जवानों ने सवाल उठाए हैं।
CLMS सुविधा का नहीं किया गया उल्लेख
एलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने महानिदेशक सीआरपीएफ को भेजे ईमेल में कहा है कि पुस्तिका में सेवानिवृत्त जवानों को CLMS के तहत मिलने वाली मदिरा सुविधा का उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि किस राज्य में किस सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर या यूनिट के माध्यम से यह सुविधा उपलब्ध है, इसकी जानकारी भी पुस्तिका में नहीं दी गई है।
गुजरात में रहने वाले पूर्व जवानों की बढ़ी परेशानी
रणबीर सिंह ने बताया कि विशेष रूप से गुजरात में रहने वाले पूर्व अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस सेंटर या किस बल की कैंटीन से CLMS सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बीएसएफ अपने सेवानिवृत्त जवानों को यह सुविधा उपलब्ध करा रही है, जबकि सीआरपीएफ के पूर्व जवानों के लिए स्पष्ट व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया गया।
डीजी सीआरपीएफ से संशोधन की मांग
एसोसिएशन ने महानिदेशक सीआरपीएफ से आग्रह किया है कि गुजरात में मदिरा लाइसेंस की व्यवस्था के लिए समूह केंद्र गांधीनगर को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही, केंद्रीय पुलिस कल्याण भंडार (CPC) और विभिन्न ग्रुप सेंटरों/बटालियन कैंटीनों में उपलब्ध घरेलू वस्तुओं एवं सुविधाओं की जानकारी भी पुस्तिका में शामिल करने की मांग की गई है।
संशोधित संस्करण जारी होने की उम्मीद
पूर्व जवानों ने उम्मीद जताई है कि सीआरपीएफ मुख्यालय जल्द ही पुस्तिका का संशोधित संस्करण जारी करेगा, जिसमें CLMS, कैंटीन सुविधा और अन्य आवश्यक जानकारियां शामिल होंगी, ताकि सेवानिवृत्त जवानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।




