CGPSC मुख्य परीक्षा परिणाम पर विवाद गहराया: मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती, इंटरव्यू पर रोक की मांग

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बिलासपुर/छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग) की मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। परीक्षा परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए अभ्यर्थियों ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

एक सप्ताह में रिजल्ट जारी होने पर उठे सवाल

अभ्यर्थियों का आरोप है कि 19 अप्रैल 2026 को आयोजित मुख्य परीक्षा का परिणाम आयोग द्वारा मात्र एक सप्ताह के भीतर जारी कर दिया गया, जिससे मूल्यांकन की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इतनी कम अवधि में उत्तर पुस्तिकाओं का पारदर्शी और विस्तृत मूल्यांकन संभव नहीं है।

RTI से जानकारी न मिलने का भी आरोप

प्रार्थियों ने बताया कि उन्होंने पहले आयोग से शिकायतें कीं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद सूचना का अधिकार (RTI) के तहत भी मूल्यांकन प्रक्रिया और परिणाम से जुड़ी जानकारी मांगी गई, लेकिन वहां से भी अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग की चुप्पी ने संदेह को और बढ़ा दिया है और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।

हाईकोर्ट में चयन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप

मामले की सुनवाई बिलासपुर हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में हुई, जहां जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया है कि CGPSC की चयन प्रक्रिया में अनियमितता और गड़बड़ी की आशंका है।

अभ्यर्थियों ने मांग की है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक इंटरव्यू और आगे की पोस्टिंग प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

अगली सुनवाई 5 अगस्त को तय

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को निर्धारित की है। यह विवाद अब राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर व्यापक बहस का विषय बन गया है।

 

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