छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में तीखी बहस हुई। मुख्य रूप से लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधूरे कार्य, शराब घोटाले और विधायक रिकेश सेन की सुरक्षा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर वाकयुद्ध हुआ।
🏗️ अधूरा काम छोड़ने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग
सभापति ने लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार टेंडर कम कीमत पर लेकर काम हासिल करते हैं, लेकिन निर्माण कार्य अधूरा छोड़ देते हैं।
- सुझाव: ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
- उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने कहा कि इस सुझाव का सम्मान किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाने पर विचार किया जाएगा।
🛣️ सड़कों और पुलों के निर्माण को लेकर सवाल
विधायक विक्रम उसेंडी ने कांकेर जिले में सड़कों और पुल-पुलियों के अधूरे निर्माण को लेकर सवाल उठाए।
- कई परियोजनाएं 2010 में मंजूर हुई थीं और 2013 तक पूरी होने थी, लेकिन अब भी अधूरी हैं।
- लगभग 60 साल पुराने पुलों का जीर्णोद्धार क्यों नहीं हुआ, इस पर भी सवाल उठाए गए।
अरुण साव का जवाब:
- पखांजूर मार्ग का चौड़ीकरण और मजबूती के लिए 91.6 किलोमीटर प्रोजेक्ट तैयार।
- 134 पुल-पुलियों का निर्माण प्रस्तावित, जिसमें से 114 पूर्ण।
- 20 पुल अधूरे छोड़ दिए गए, जिनमें से दो नए पुलों को राज्य मद से स्वीकृति मिली।
🥃 शराब घोटाले को लेकर विवाद
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आबकारी मंत्री से सवाल किए कि शराब घोटाले में कुल कितनी राशि का मामला सामने आया और अब तक कितने लोगों से वसूली हुई।
- उन्होंने सदन को आगाह किया कि बिना पुख्ता जानकारी के किसी को आरोपित न करें।
🛡️ विधायक रिकेश सेन की सुरक्षा
विधायक रिकेश सेन ने अपनी जान को खतरा बताया।
- कांग्रेस नेताओं भूपेश बघेल और उमेश पटेल ने सरकार से स्पष्ट बयान की मांग की।
- संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि विधायक से बात की गई है और सुरक्षा को लेकर गंभीरता है।
- विपक्ष की मांग पूरी न होने पर कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट किया।
भूपेश बघेल का बयान:
“यदि एक विधायक ही असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।”

