सड़क हादसे के बाद खुला मामला, पिकअप वाहन से ठूंस-ठूंसकर ले जाए जा रहे थे बैल
बलरामपुर-रामानुजगंज। Balrampur Crime के तहत थाना राजपुर पुलिस ने पशुओं के प्रति क्रूरता और अवैध परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक बलरामपुर-रामानुजगंज के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी कुसमी के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई।
हादसे के बाद सामने आया अवैध परिवहन का मामला
पुलिस के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को एक प्रार्थी ने थाना राजपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह ग्राम कमारी से लौट रहा था। इसी दौरान ग्राम परसापानी के पास पिकअप वाहन क्रमांक JH-01-FL-8856 के चालक ने तेज एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उसकी कार को टक्कर मार दी।
घटना के बाद वाहन की जांच की गई तो उसमें 8 नग बैलों को बेहद क्रूरतापूर्वक ठूंस-ठूंसकर लादकर अवैध रूप से परिवहन करते पाया गया।
8 बैल बरामद, वाहन जब्त
मामले में थाना राजपुर में अपराध क्रमांक 176/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और वाहन की तलाशी ली। इस दौरान पिकअप वाहन से 8 बैल बरामद कर विधिवत जब्त किए गए।
झारखंड ले जाने की थी तैयारी
पुलिस जांच में वाहन चालक और उसके सहयोगी की पहचान की गई। दोनों आरोपियों को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने बैलों को झारखंड ले जाने के उद्देश्य से परिवहन करने की बात स्वीकार की।
दोनों आरोपी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान—
- सुलतान अंसारी (25 वर्ष), पिता सनाउल्ला अंसारी, निवासी कोटाम, थाना गुमला, जिला गुमला (झारखंड)।
- नेयाजरिद (नैयाज) बख्श (21 वर्ष), पिता रमजान बख्श, निवासी होरी, थाना गुमला, जिला गुमला (झारखंड)।
के रूप में हुई है।
कई धाराओं में कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281, 125, 3(5), पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(घ), छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 तथा मोटरयान अधिनियम की धारा 112/183 के तहत कार्रवाई की है।
दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड के लिए JMFC न्यायालय राजपुर भेजा गया है।
पुलिस ने की जनता से अपील
बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि पशुओं के अवैध परिवहन, पशु क्रूरता या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल नजदीकी पुलिस थाना या डायल-112 पर दें, ताकि समय पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।




