खनिज विभाग का मिलीभगत खेल,, कागज पर वैध दिखा कर राजस्व को लग गए करोड़ों का चुना
सारंगढ़ जिले में गौण खनिज के अवैध कारोबार का एक और बड़ा मामला सामने आया है। केजड़ीवाल क्रशर संचालक पर आरोप है कि खनिज विभाग से स्वीकृत चिन्हांकित लीज स्थान पर आज तक एक फावड़ा खनन नहीं हुआ, लेकिन कागजों में करोड़ों रुपये की रॉयल्टी पर्ची जारी हो चुकी है। खनिज विभाग मिलीभगत का जीता जागता सबूत केजडीवाल क्रेशर उद्योग है जहां पर देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि खनिज विभाग और केजडीवाल संचालक द्वारा शासन को किस तरह से चूना लगाया जा रहा है। खनिज विभाग में फिक्सिंग रेट तय कर के पट्टे दारो को रायल्टी पर्ची जारी कर देते हैं। फिर संचालक द्वारा रॉयल्टी पर्ची को बाजार में शासन द्वारा निर्धारित मूल्य से चार गुना अधिक बढ़ा कर बेचा जाता है जबकि नियमानुसार गलत है। और ऐसे ही कई चुना पत्थर खदान है जो पूरी तरह से अवैध है केवल शासन के कागज पर वैध है।

क्या है पूरा मामला
1. लीज पर सन्नाटा: खनिज विभाग के रिकॉर्ड में ख.न. 364/1,366/2,365/1,347/2,362/1,362/3 कुल रकबा 1.234 हे. पर विभाग द्वारा खनन करने के लिए दिनांक 23/06 /2010 से 22/06/ 2040 तक वैध खनन अनुमति मिला है जिस खसरा नंबर पर केजड़ीवाल क्रशर को लाइमस्टोन/पत्थर खनन की लीज दी गई है, वहां मौका-मुआयना करने पर खनन का कोई कार्य नहीं मिला। जमीन जस की तस है। और विभाग द्वारा लाखों करोड़ों का रॉयल्टी पर्ची जारी किया गया जिससे साफ साफ पता चलता है कि विभाग माफियाओं के वश में रह कर काम करते हैं।
2. रॉयल्टी में खेल: चौंकाने वाली बात ये है कि बिना खनन के ही इसी लीज से करोड़ों रुपये की रॉयल्टी पर्ची कट चुकी है। आशंका है कि दूसरी अवैध खदानों से निकाले गए माल को वैध दिखाने के लिए इस लीज की पर्चियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
नियम क्या कहते हैं
छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 के तहत लीज क्षेत्र से बाहर खनन करना और बिना उत्पादन के रॉयल्टी पर्ची जारी करना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं। इसमें लीज निरस्त करने के साथ-साथ जुर्माना और FIR का भी प्रावधान है।
ग्रामीणों में आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्रशर संचालक की मनमानी से शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। पर्यावरण और सड़कें खराब हो रही हैं, लेकिन कागजों में सब “वैध” दिख रहा है।
अब आगे क्या
अगर भौतिक सत्यापन में आरोप सही पाए गए तो लीज निरस्त करने, जारी रॉयल्टी की वसूली और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई बनती है। अब देखने वाली बात होगी कि खनिज विभाग कार्रवाई करता है या फिर मामला फाइलों में दब जाता है।


